मेलबर्न टेस्ट के चौथे दिन जब लंच के पहले ही भारतीय टीम ने पारी घोषित कर दी तो लगने लगा कि मुकाबला चौथे दिन ही खत्म हो जाएगा. एमसीजी की असमान उछाल वाली पिच पर 399 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करना असंभव जैसा था. लंच से पहले ही ऑस्ट्रेलियाई टीम के दोनों सलामी बल्लेबाज पवेलियन लौट गए तो मैच के पांचवें दिन तक खिंचने की संभावना और कम हो गई. लंच के बाद भी कंगारू टीम को कोई बल्लेबाज टिक नहीं पाया और चायकाल तक उसके पांच विकेट गिर चुके थे. टी के ठीक बाद टीम के अंतिम नियमित बल्लेबाज ट्रेविस हेड आउट हुए तो लगा कि जल्द ही मैच खत्म हो जाएगा. लेकिन इसके बाद बल्लेबाजी के लिए आए पैट कमिंस ने ऐसा खूंटा गाड़ा कि अपने दम पर मुकाबले को पांचवें दिन तक खींच ले गए. इतना ही नहीं, उनके ऑलराउंड प्रदर्शन को देखते हुए सोशल मीडिया पर यह चर्चा चल पड़ी कि कमिंस को देश का प्रधानमंत्री बनना चाहिए.

देश का प्रधानमंत्री बनने की बात मजाक भी मान लें तो भी इतना स्पष्ट है कि कमिंस इस सीरीज में कंगारू टीम के सबसे वैल्यूएबल प्लेयर हैं. गेंदबाजी आक्रमण की जिम्मेदारी उनके कंधों पर है ही, बल्लेबाजी में भी वे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. इस सीरीज में अब तक वे सात घंटे से ज्यादा बल्लेबाजी कर चुके हैं, जो टीम के अधिकांश मुख्य बल्लेबाजों से ज्यादा है. उन्होंने सीरीज में अब तक 136 रन बनाए हैं.

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बॉक्सिंग डे टेस्ट के चौथे दिन उन्होंने गेंदबाजी के साथ बल्लेबाजी में करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. इससे पहले मैच के तीसरे दिन उन्होंने अपने दम पर भारत की दूसरी पारी को तहस-नहस कर दिया था. उन्होंने इस दौरे पर टीम इंडिया के दो सबसे सफल बल्लेबाजों- विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा को बिना कोई रन बनाए एक ही ओवर में पवेलियन भेज दिया था. ऑस्ट्रेलियाई टीम पहली पारी में भारत के स्कोर से इतनी पीछे रह गई थी कि दूसरी पारी में कमिंस के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बाद भी मैच में उसकी वापसी की संभावना नहीं थी.

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करियर की शुरुआत में इंज्युरी से परेशान रहे कमिंस ने ऑस्ट्रेलिया के घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन के बाद 2011 में पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेला. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले ही मैच में सात विकेट लेकर उन्हें अपनी टीम को जीत दिलाई तो उन्हें ऑस्ट्रेलिया की बॉलिंग अटैक का भविष्य माना जाने लगा. लेकिन इसके बाद वे चोटों से ऐसे परेशान हुए कि अगले छह साल तक टेस्ट क्रिकेट नहीं खेल पाए. 2017 में भारत के खिलाफ ही वापसी करने के बाद वे लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. अच्छी बात यह भी है कि उनकी फिटनेस को लेकर भी सवाल नहीं उठ रहे. टीम मैनेजमेंट की मानें तो एक साल के अंदर ही वे बॉलिंग अटैक की धुरी और टीम के संकटमोचक बन गए हैं.