नई दिल्ली. रांची वनडे में बड़ी उम्मीद थी कि टीम इंडिया मैच जीतकर सीरीज पर कब्जा भी करेगी और वनडे में नंबर वन टीम की हकदार भी बनेगी. लेकिन, ऐसा हो न सका. मुकाबला तो रोमांचक हुआ. कप्तानी पारी खेलते हुए विराट ने लोहा भी खूब लिया. लेकिन, सब तब व्यर्थ हो गया जब खाते में हार दर्ज हो गई. रांची वनडे में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 32 रन से हराया. हालांकि, इस हार के बावजूद 5 वनडे की सीरीज में टीम इंडिया 2-1 से आगे है यानि उसके सीरीज जीतने की उम्मीदें तो हैं लेकिन नंबर वन वनडे टीम बनने का ख्वाब मटियामेट हो गया.

भारत को 314 रन का लक्ष्य

रांची में पहले खेलते हुए ऑस्ट्रेलिया ने फिंच के 93 रन और ख्वाजा के शानदार शतक की बदौलत भारत के सामने 314 रन का विशाल लक्ष्य रखा. इस टारगेट को चेज करते हुए भारतीय टीम ने अपने टॉप ऑर्डर के 3 विकेट सिर्फ 16 रन पर गंवा दिए. हालांकि, इसके बाद विराट और धोनी के बीच अच्छी साझेदारी बनती दिखी. लेकिन, जब लगा कि सबकुछ ठीक चल रहा है जंपा ने धोनी की गिल्ली बिखेर दी.

विराट शतक भी न आया काम

धोनी के पवेलियन लौटने के बाद विराट आतिशी मूड में हो गए और दे दना दन रन बरसाने लगे. विराट ने जल्दी ही अपना 41वां शतक पूरा किया. इस वक्त ऐसा लग रहा था कि मैच भारत की मुठ्ठी में है. लेकिन, तभी जंपा ने फिर से अपना जाल फैलाया और विराट का शिकार कर ऑस्ट्रेलिया को राहत की सांस पहुंचाई. खैर, विराट के जाने के बाद भी मैच में रोमांच बरकरार रहा. इसकी वजह थे विजय शंकर, जडेजा और उसके बाद बल्लेबाजी के लिए आए मोहम्मद शमी. इन तीनों ने बल्लेबाजी तो जोरदार की पर भारत के लिए जीत की दहलीज नहीं लांघ सके. नतीदा ये हुआ कि 314 के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारतीय टीम 281 रन पर ही ढेर हो गई. ये भारत को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ रांची में मिली पहली हार है जबकि ओवरऑल मिली दूसरी हार.

नंबर वन बनने का सपना चूर

भारत अगर रांची में सीरीज पर कब्जा करता तो उसे वनडे में नंबर वन टीम का तमगा मिलता. यही नहीं वो सीरीज में 5-0 से क्लीन स्वीप करता तो वनडे की उसकी बादशाहत भी टेस्ट की तरह मजबूत हो जाती जो कि वर्ल्ड कप से पहले हौसले को परवान चढ़ाने वाली साबित होती. लेकिन धोनी के घर में न तो जीत नसीब हुई न ही नंबर वन का सिंहासन.