नई दिल्ली. IPL का ग्यारहवां सीजन अब अपने आखिरी चरण में एंट्री ले चुका है, जहां प्ले ऑफ के मुकाबले जारी है. रविवार को IPL-11 का फाइनल खेला जाएगा जिसमें एक टीम तो CSK है जबकि दूसरी टीम का फैसला आज खेले जाने वाले दूसरे क्वालिफायर से होगा. बहरहाल, इस सीजन का चैम्पियन कौन बनेगा ये तो सुपरसंडे को पता चलेगा लेकिन उससे पहले ऑस्ट्रेलियाई IPL में अपनी हरकतों के लेकर एक बार फिर से निशाने पर आ गए हैं. ऑस्ट्रेलिया वालों पर IPL के इस सीजन में भेदभाव करने के संगीन आरोप लगे हैं. Also Read - PSL 2020: डैरेन सैमी बने पेशावर जालिमी के कोच; कहा- मुश्किल था ये फैसला

कंगारुओं पर लगे संगीन आरोप Also Read - पाकिस्तान ने किया डैरन सैमी को मानद नागरिकता देने का ऐलान; विंडीज खिलाड़ी ने कहा- नहीं चाहिए पाकिस्तानी पासपोर्ट.....

IPL में ऑस्ट्रेलिया वालों पर भेदभाव करने के आरोप दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान ग्रीम स्मिथ ने लगाए हैं. स्मिथ के इस आरोप को वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान डैरेन सैमी ने समर्थन देकर और मजबूती दी है. दोनों पूर्व कप्तानों का कहना है कि, ” ऑस्‍ट्रेलियन कोच अपने देश के खिलाडि़यों को ज्‍यादा से ज्‍यादा मौके देते हैं जबकि दूसरे देशों के क्रिकेटरों को भरपूर समय नहीं देते.” बता दें कि IPL की 8 टीमों में से 4 के कोच ऑस्ट्रेलियाई हैं. सनराइजर्स हैदराबाद के कोच टॉम मूडी, दिल्ली डेयरडेविल्स के कोच रिकी पॉन्टिंग, किंग्स इलेवन पंजाब के कोच ब्रैड हॉग और राजस्थान रॉयल्स के मेंटॉर शेन वॉर्न. Also Read - टी20 अंतरराष्ट्रीय में सर्वाधिक बाईलैटरल सीरीज जीतने वाले कप्तान बने विराट कोहली

भेदभाव कहां?

अब जरा ये समझिए कि भेदभाव के आरोप में कितना दम है. दिल्ली की टीम के कोच रिकी पॉन्टिंग ने 12 मैचों में ग्लेन मैक्सवेल को खिलाया लेकिन इनमें उनका स्कोर सिर्फ 169 रन रहा. वहीं दूसरे ऑस्ट्रेलियाई डेन क्रिस्टियन ने दिल्ली के लिए 4 मैच खेले और 26 रन बनाए. जबकि इनके मुकाबले इंग्लैंड के जेसन रॉय ने 5 मुकाबलों में ही 120 रन बनाए. पंजाब की टीम का हाल भी ऐसा ही है. कोच ब्रैड हॉज मे फिंच को 10 मुकाबलों में मौके दिए लेकिन उन्होंने रन बनाए सिर्फ 134. मार्क्स स्टोइनिस ने 7 मुकाबलों में 99 रन बनाए. जबकि इनके मुकाबले कभी पंजाब की टीम की कप्तानी करने वाले साउथ अफ्रीका के डेविड मिलर सिर्फ 3 मैच ही खेल सके. राजस्थान की टीम में ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी डार्सी शॉर्ट को 7 मैचों में मौका मिला और वो सिर्फ 115 रन बना सके. जबकि इनके मुकाबले दक्षिण अफ्रीका के क्लासेन को सिर्फ 4 मैच खिलाया गया.

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साफ है कि ऑस्ट्रेलियाई थिंक टैंक से लैस टीमों ने दूसरे देशों के खिलाड़ियों के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को मौके थोड़े ज्यादा दिए हैं. इसी का परिणाम भी है कि उन टीमों मे सिर्फ टॉम मूडी की कोचिंग वाली टीम सनराइजर्स हैदराबाद ही फाइनल की रेस में है. इसके अलावा राजस्थान एलिमिनेटर हारकर बाहर हो गई. पंजाब 7वें नंबर पर रही जबकि दिल्ली सबसे आखिरी पायदान पर.