एक जुलाई की सुबह ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटरों के लिए बेरोजगारी लेकर आई. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर्स असोसिएशन दोनों ने शुक्रवार को ही ही इस बात की पुष्टि कर दी थी कि नए वेतन प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने की समयसीमा 30 जून तक इस पर कोई सहमति न बन पाने के कारण ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी बेरोजगार हो गए हैं. इससे इस साल अगस्त में बांग्लादेश, अक्टूबर में भारत और साल के अंत में होने वाली एशेज सीरीज पर संदेह के बादल मंडराने लगे हैं.Also Read - Ashes 2021-22: कोरोना काल में स्थगित न हो एशेज इसलिए क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया कर रहा यह कोशिश

बोर्ड और ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर्स असोसिएशनके बीच पिछले कई महीनों से जारी बातचीत के बावजूग नए वेतन प्रस्ताव पर कोई सहमति न बन पाने से 1 जुलाई से करीब घरेलू और इंटरनेशनल स्तर के करीब 230 पुरुष और महिला क्रिकेटरों के प्रोफेशनल भविष्य पर सवालिया निशाल लग गए हैं. Also Read - पापा बने Aaron Finch, पत्नी एमी और नवजात बेटी के साथ शेयर की तस्वीर

ऑस्ट्रेलिया खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया के अपनी बेरोजगार के संकट को लेकर पोस्ट शेयर किए हैं. हालांकि मैक्सेवल और वॉर्नर जैसे खिलाड़ियों ने अपनी बेरोजगारी पर मजाकिया लहजे के पोस्ट किए. ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने इंस्टाग्राम पर अपना एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि वह स्विंग की प्रैक्टिस कर रहे हैं, हालांकि वह गोल्फ की स्विंग की प्रैक्टिस कर रहे थे. Also Read - मुझे Justin Langer के लिए दुख है लेकिन जब आप ऑस्ट्रेलिया के कप्तान या कोच हैं तो आलोचनाएं झेलनी पड़ती हैं: Ricky Ponting

मैक्सवेल की इस पोस्ट पर वॉर्नर ने लिखा, ‘मैं इस हफ्ते के अंत में अपनी पहली स्काईडाइव कर सकता हूं.’ हालांकि इससे पहले वॉर्नर ने इंस्टाग्राम पर शेयर एक पोस्ट में बेरोजगारी के मुश्किल दिनों में अपनी पत्नी के साथ लिए उनका शुक्रिया अदा किया था.

ऑस्ट्रेलियन क्रिकेटर्स असोसिएशन द्वारा जारी किए गए एक वीडियों में जोश हेजलवुड ने कहा कि पिछले 10 सालों से करार में रहने के बाद अब बेरोजगार होना उनके लिए अलग स्थिति है और देखते हैं कि ये कैसे बीतता है.


खिलाड़ियो के संघ ने कहा कि वे रविवार को सिडनी में बैठक करके अनुबंध को लेकर इस गतिरोध पर विस्तृत चर्चा करेंगे.

नए वेतन प्रस्ताव के तहत क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने 20 साल से जारी बोर्ड के राजस्व की निश्चित राशि को खिलाड़ियों के साथ साझा करने की व्यवस्था को खत्म करने का प्रस्ताव किया है, जोकि खिलाड़ियों को नामंजूर है. बोर्ड का कहना है कि ऐसा करने से उसके पास देश में क्रिकेट के विकास पर खर्च करने के लिए पैसा नहीं रहेगा.