नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौजूदा टेस्ट सीरीज का तीसरा मैच. भारतीय टीम में तीन सलामी बल्लेबाज हैं- केएल राहुल, मुरली विजय और मयंक अग्रवाल. लेकिन मैदान पर ओपनिंग करने मयंक अग्रवाल के साथ आते हैं हनुमा बिहारी जिन्होंने इससे पहले कभी अंतरराष्ट्रीय मैचों में ओपनिंग नहीं की. हनुमा ने केवल आठ रन ही बनाए, लेकिन इसके बावजूद वे विदेशी दौरों पर भारतीय सलामी जोड़ी की रिकॉर्ड का हिस्सा बन गए. हनुमा और मयंक की जोड़ी 18.5 ओवर तक मैदान पर टिकी रही. आश्चर्य यह कि 2011 के बाद यह पहला मौका है जब ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका या न्यूजीलैंड दौरे में टीम इंडिया की ओपनिंग जोड़ी इतने लंबे समय तक मैदान पर टिकी रही.

ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका की पिचों पर तेजी, स्विंग और बाउंस होती है. स्लो और स्पिनिंग पिचों पर खेलने के अभ्यस्त भारतीय बल्लेबाजों को इन देशों में खेलने में परेशानी होती है, लेकिन यदि टीम के सलामी बल्लेबाज शुरुआत के पांच ओवर भी नहीं खेल पाएं तो क्या टीम को स्पेशलिस्ट ओपनिंग जोड़ी की जरूरत है.

2011 के बाद भारतीय टीम के इन चारों के दौरों पर नजर डालें तो स्पष्ट है कि भारत की सलामी जोड़ी 48 फीसदी मैचों में पहले पांच ओवर भी मैदान पर टिक नहीं पाई. 26 फीसदी पारियों में वे 10 ओवर तक टिक पाए जबकि केवल 4.8 फीसदी मैचों में टीम को 15 ओवर के बाद पहला झटका लगा. 2011 के बाद के आंकड़ों के अनुसार 62 पारियों में नौ मौकों पर टीम को पहले ओवर में ही विकेट खोना पड़ा जबकि 16 मौकों पर सलामी जोड़ी 10 ओवर से ज्यादा समय तक मैदान पर टिकी रही.

टीम इंडिया के लिए एक दौर वीरेंद्र सहवाग और गौतम गंभीर की जोड़ी का था जो ज्यादा देर विकेट पर नहीं टिके, फिर भी टीम को रनों के लिहाज से अच्छी शुरुआत मिल जाती थी. सहवाग शुरू से ही आक्रामक रवैया अपनाते, लेकिन अब वो दौर भी बीते जमाने की बात हो चुकी है. साल 2011 में दक्षिण अफ्रीका दौरे के बाद से भारतीय सलामी जोड़ी 62 मौकों पर मैदान पर उतरी है, लेकिन केवल सात बार यह जोड़ी 50 रन की साझेदारी कर पाई है. इस दौरान टीम इंडिया की औसत साझेदारी 21.03 रनों की रही है.

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अब आते हैं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ चल रही मौजूदा टेस्ट सीरीज पर. सीरीज के पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में भारत का पहला विकेट दूसरे ओवर में गिरा जब टीम का स्कोर तीन रन था. इसी टेस्ट की दूसरी पारी में राहुल और विजय ने 63 रन जोड़े जो पिछले सात साल में भारतीय ओपनिंग जोड़ी का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में सलामी जोड़ी 18 गेंद ही टिक पाई. दूसरी पारी में टीम का पहला विकेट पहले ओवर में ही गिर गया जब टीम इंडिया का खाता भी नहीं खुला था.

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दो टेस्ट मैचों की आठ पारियों में भारत के सलामी बल्लेबाज कुल मिलाकर 96 रन ही बना पाए और टीम मैनेजमेंट को मजबूर होकर मयंक अग्रवाल के साथ हनुमा बिहारी को ओपनिंग के लिए भेजना पड़ा. अपना पहला टेस्ट खेल रहे मयंक ने हाफ सेंचुरी लगाई. हनुमा बिहारी रन तो ज्यादा नहीं बना सके लेकिन पहले विकेट के लिए 40 रन की साझेदारी और 18.5 ओवर तक टिके रहकर उन्होंने यह तो बता दिया है कि विदेशी दौरों के लिए टीम इंडिया के पास अब भी ओपनिंग जोड़ी नहीं है. इन रिकॉर्ड्स को देखने के बाद सवाल यह भी उठता है कि टीम को इन चारों देशों के लिए टीम को स्पेशलिस्ट ओपनिंग जोड़ी की जरूरत क्या है.