स्टार पहलवान बजरंग पूनिया ने शुक्रवार को निजी कोच शाको बेनटीनिडिस को हटाने संबंधित की खबरों को खारिज करते हुए कहा कि ये जार्जियाई कोच अब भी उनकी टीम में शामिल है और सहयोगी स्टाफ को बदलने की उनकी कोई योजना नहीं है।

खबरों में आया कि बजरंग ने कोच से नाता तोड़ दिया है तो इस पर बजरंग ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘मुझे समझ नहीं आ रहा कि किसने ये कहा और क्यों? शाको मेरे कोच हैं और मुझे इस बारे में बात करनी चाहिए थी। इस तरह की खबरें पढ़कर मुझे सचमुच बुरा महसूस हो रहा है। इनमें कोई सच्चाई नहीं है।’’

दुनिया के 65 किग्रा में नंबर एक मुक्केबाज ने कहा, ‘‘वो मेरे निजी कोच हैं जिन्हें जेएसडब्ल्यू ने मुहैया कराया है। ये मेरी समझ से बाहर है कि ऐसा क्यों कहा गया कि मैंने उनसे रिश्ता तोड़ दिया है। कौन ये कह रहा है और क्यों? मुझे कोच बदलने की जरूरत नहीं है।’’ जब जेएसडब्ल्यू से संपर्क किया गया तो उसने कहा कि ना तो वे और ना ही बजरंग कभी भी शाको को छोड़ना चाहते हैं।

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जेएसडब्ल्यू की ‘स्पोर्ट्स एक्सीलेंस एंड स्काउटिंग’ प्रमुख मनीषा मल्होत्रा ने कहा, ‘‘हमें यह बहुत अच्छी तरह पता है कि अगर बजरंग शाको के साथ ट्रेनिंग नहीं करना चाहते हैं तो हम उन्हें नहीं रखेंगे। लेकिन न तो बजरंग और न ही डब्ल्यूएफआई ने हमें शाको को हटाने के लिये कहा है। विश्व चैम्पियनशिप को खत्म हुए एक महीने का समय हो चुका है, अगर यह कदम उठाना होता तो हम इसके बाद ही ऐसा कर देते। ’’

डब्ल्यूएफआई हालांकि विश्व चैम्पियनशिप में सेमीफाइनल मुकाबले के दौरान कजाखस्तान के दौलत नियाजबेकोव को रैफरी द्वारा चार अंक प्रदान किये जाने के बाद शाको के विरोध दर्ज कराने से खुश नहीं था।

इससे बजरंग ने एक अतिरिक्त अंक गंवा दिया और डब्ल्यूएफआई को लगता है कि इस यह भारतीय फाइनल में पहुंचने से चूक गया और उसे लगता है कि बजरंग का पैर से डिफेंस अब भी कमजोर है।

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मनीषा ने कहा, ‘‘मैं जानती हूं कि महासंघ उसके विरोध दर्ज कराने से खुश नहीं था। लेकिन पूरी तस्वीर देखिये। शाको ने बजरंग को दुनिया के नंबर एक स्थान पर पहुंचा दिया। अभी बजरंग पर ओलंपिक में पदक जीतने का दबाव है और ओलंपिक के करीब कोच बदलने का कदम रणनीतिक तौर पर अच्छा नहीं दिखता इसलिये फिलहाल ऐसी कोई योजना नहीं है। ’’

भारतीय कुश्ती महासंघ ने हालांकि कहा कि उसे इसके बारे में कोई जानकारी नहीं है। डब्ल्यूएफआई के सहायक सचिव विनोद तोमर ने कहा, ‘‘यह बजरंग से संबंधित मुद्दा है और वही फैसला कर सकता है कि वह शाको को चाहता है या नहीं। हमने उसे नियुक्त नहीं किया। हम पहलवानों को नहीं कह सकते कि आप इन कोचों के साथ ट्रेनिंग मत करो। हमें ओलंपिक पदक से मतलब है। अगर कोई ट्रेनिंग नहीं करता, हम उसे ट्रेनिंग के लिये बाध्य कर सकते हैं लेकिन बजरंग ट्रेनिंग कर रहा है और उसे अपनी पसंद के कोच के साथ ट्रेनिंग करने की आजादी है। ’’

बजरंग कोहनी की चोट के लिये रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया से गुजर रहे हैं और जल्द ही शाको के साथ ट्रेनिंग शुरू करेंगे।