इंग्लैंड के साथ राजकोट में बुधवार से शुरू हो रहे पहले टेस्ट मैच को संचालित कराने के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने फंड की मांग की है। इसके लिए बीसीसीआई ने मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया। सर्वोच्च न्यायालय ने फिलहाल बीसीसीआई पर वित्तीय फैसले लेने पर रोक लगा रखी है। न्यायालय ने कहा है कि लोढ़ा समिति की सिफारिशों को मानने के बाद ही बोर्ड को वित्तीय अधिकार मिल सकत हैं। यह भी पढ़े: अपने से 6 साल छोटे सचिन की पहली नज़र में ही दीवानी हो गई थी अंजलि, 1995 में हुई थी दोनों की शादी

न्यायमूर्ति अनिल आर. दवे और न्यायमूर्ति एएम खानविल्कर की खंडपीठ के सामने पेश होते हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर बीसीसीआई को फंड जारी नहीं किए गए तो राजकोट टेस्ट रद्द किया जा सकता है।

सिब्बल ने न्यायालय से इस मामले में त्वरित सुनवाई का अनुरोध किया। दूसरी ओर, लोढ़ा समिति के वकील गोपाल एस. ने न्यायालय को बताया कि बीसीसीआई ने न्यायालय के 21 अक्टूबर के आदेश को नहीं माना है।

गोपाल एस. ने कहा कि न्यायायालय द्वारी स्वीकृत लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुसार बीसीसीआई को शर्तो के मानने से पहले किसी भी प्रकार का फंड नहीं दिया जाना चाहिए।

इस पर सिब्बल ने कहा, “ठीक है कि हमने (बीसीसीआई) ने न्यायालय के आदेश का पालन नहीं किया लेकिन इसके बावजूद लोढ़ा समिति को फंड जारी करने को कहा जाए क्योंकि अगर फंड नहीं मिला तो राजकोट टेस्ट रद्द किया जा सकता है।”

इस पर न्यायमूर्ति दवे ने कहा कि वह इस मामले में प्रधान न्यायाधीश टीएस ठाकुर से भोजनकाल के दौरान मिलेंगे और कोई भी फैसला लेने से पहले उनसे चर्चा करेंगे।