भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने साल 2008 में इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) की शुरुआत साथ तेजी से विश्व क्रिकेट का हिस्सा बन रही टी20 लीगों के मार्केट में कदम रखा था। भारत की इस मशहूर लीग में दुनिया भर के खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि बीसीसीआई अपने खिलाड़ियों को किसी विदेशी लीग में खेलने की इजाजत नहीं देती है। Also Read - अभी ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सीरीज के बारे में नहीं सोच सकते: गेंदबाजी कोच भरत अरुण

पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज इरफान पठान (Irfan Pathan) और टीम से बाहर चल रहे बल्लेबाज सुरेश रैना (Suresh Raina) ने हालिया बयान में बीसीसीआई से सालाना कॉन्ट्रेक्ट से बाहर हुए खिलाड़ियों को विदेशी लीगों में खेलने की अनुमति देने की मांग की थी लेकिन बोर्ड अधिकारी इससे सहमत नहीं है। दरअसल बीसीसीआई अपने खिलाड़ियों की विशेषता को बनाए रखने के लिए उन्हें विदेशी लीगों में खेलने की इजाजत नहीं देता। Also Read - कोहली-स्मिथ जैसा बल्लेबाज बनने के करीब हैं बाबर आजम : मिसबाह उल हक

बीसीसीआई के एक अधिकारी ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि खिलाड़ियों को विदेशी टी-20 लीगों से दूर रखने के पीछे कारण उन्हें विशेष बनाना है। उन्होंने कहा कि इसके पीछे वजह एक ऐसा सिस्टम बनाने की है जहां गैरअनुबंधित खिलाड़ी को आईपीएल नीलामी में अच्छी खासी रकम मिले। Also Read - शिखर धवन ने कहा- अगर IPL हुआ तो काफी सकारात्मकता लेकर आएगा ये टूर्नामेंट

अधिकारी ने कहा, “आपको ये विचार उन खिलाड़ियों से सुनने को मिल जाएंगे जो संन्यास लेने के करीब हैं और ये काफी स्वाभाविक है। ये उनके विचार हैं। ये विचारों को रखने का मामला है और ये एकदम सही है। मगर बोर्ड के नजरिए से और भारतीय क्रिकेट के हित के नजरिए से देखा जाए तो इसके पीछे विचार इस बात को सुनिश्चित करना है कि गैर-अनुबंधित खिलाड़ियों को आईपीएल नीलामी में अच्छी रकम मिले। विशेषता अहम है।”

विदेशी लीगों में निवेश ना करें आईपीएल के स्टेकहोल्डर्स

अधिकारी ने यहां तक कह दिया है कि जिनका आईपीएल में शेयर है उन्हें विदेशी लीगों में निवेश करने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, “बल्कि अब तो समय आ गया है कि जिन फ्रेंचाइजियों का आईपीएल में स्टेक है उनको अब विदेशी लीगों में निवेश करने के बारे में नहीं सोचना चाहिए क्योंकि आगे जाकर ये कहीं न कहीं शीर्ष अदालत द्वारा प्रस्तावित हितों के टकराव का मुद्दा बन सकता। साथ ही स्थिति ऐसी है कि इस समय विदेशी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के बजाए भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जाए।”