नई दिल्ली: गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त सीओए द्वारा नए सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट की घोषणा के अगले ही दिन इसके भविष्य पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं. बोर्ड के पदाधिकारियों का कहना है कि कॉन्ट्रैक्ट के बारे में उन्हें कुछ नहीं बताया गया और वे इस पर अपने हस्ताक्षर नहीं करेंगे. वहीं, सीओए ने इन आरोपों से इंकार किया है और बोर्ड के मौजूदा संविधान का हवाला देते हुए नए पदाधिकारियों के चुनाव की मांग की है. Also Read - अगस्त-सितंबर में टीम इंडिया का कैंप लगाने के बारे में सोच रही है बीसीसीआई

बीसीसीआई के कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी ने गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय और घरेलू क्रिकेटरों को केंद्रीय अनुबंध देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए और कहा कि इस मामले में बोर्ड के किसी भी पदाधिकारी को संज्ञान में नहीं लिया गया. सीओए सदस्य डायना एडुल्जी ने हालांकि आरोप लगाया कि बीसीसीआई वित्त समिति तीन बार याद दिलाए जाने के बावजूद केंद्रीय अनुबंध को दबाए बैठी थी तथा चौधरी सहित सभी पदाधिकारियों को सूचित किया गया था. अक्तूबर 2017 से सितंबर 2018 तक के लिए अनुबंध कल घोषित किए गए जिसमें खिलाड़ियों को मिलने वाली धनराशि में काफी बढ़ोतरी की गई है. Also Read - फ्लॉप XI में मनोज तिवारी का नाम देख भड़की पत्नी सुष्मिता

चौधरी ने कहा, ‘‘मैं पक्के तौर पर कह सकता हूं कि मैं इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं था. मैं यह भी कह सकता हूं कि बोर्ड से कोई भी इसमें शामिल नहीं था. मैं सीनियर चयन समिति का समन्वयक भी हूं और कोई बैठक नहीं बुलायी गई थी. अगर वे (केंद्रीय अनुबंध) मेरे पास आते हैं तो मैं उस पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा.’’ एडुल्जी ने इसके जवाब में कहा कि चयनकर्ताओं की शनिवार को बैठक हुई थी और उन्होंने खिलाड़ियों के ग्रेड तय किए. एडुल्जी ने कहा, ‘‘हमने बीसीसीआई वित्त समिति को तीन बार पत्र लिखा (पहली बार अक्तूबर और हाल में जनवरी में), लेकिन जवाब नहीं मिला. अब खिलाड़ियों का बीमा का भी नवीनीकरण होना है, इसलिए हमने अनुबंध पर फैसला किया.’’ Also Read - वर्ल्ड रिकॉर्ड बना चुकी टीम इंडिया की ये ऑलराउंडर इस पुरस्कार के लिए हुई नॉमिनेट

ऑफ स्पिनर जयंत यादव और करुण नायर को पिछले एक साल में भारत की तरफ से नहीं खेलने के बावजूद अनुबंध दिया गया है जबकि श्रीलंका दौरे पर गयी टीम में शामिल ऋषभ पंत को इसमें शामिल नहीं किया गया है जिस पर सवाल उठ रहे हैं. विश्व कप टीम में जगह के दावेदार श्रेयस अय्यर को भी अनुबंध नहीं मिला है.

दूसरी ओर, बीसीसीआई के वर्तमान पदाधिकारियों के साथ टकराव के बीच प्रशासकों की समिति (सीओए) ने गुरुवार को उनकी बर्खास्तगी की मांग की. सीओए का कहना है कि बीसीसीआई के संविधान के अनुसार इन पदाधिकारियों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है. सीओए ने उच्चतम न्यायालय से इसके साथ लोढ़ा समिति की सिफारिशों के अनुरूप नए संविधान को औपचारिक तौर पर अपनाए बिना एजीएम के लिए भी निर्देश देने की अपील की. विनोद राय और डायना एडुल्जी के दो सदस्यीय सीओए पैनल ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी आठवीं स्टेटस रिपोर्ट सौंपी जिसमें उन्होंने कार्यवाहक अध्यक्ष सीके खन्ना, कार्यवाहक सचिव अमिताभ चौधरी और कोषाध्यक्ष अनिरूद्ध चौधरी को हटाकर नए पदाधिकारियों का चुनाव करवाने की सिफारिश की. सीओए ने इसके साथ ही आईपीएल अध्यक्ष राजीव शुक्ला को भी बर्खास्त करने के लिये कहा क्योंकि उनका भी कार्यकाल समाप्त हो गया है.

बीसीसीआई पदाधिकारियों और सीओए के बीच रिश्ते काफी तल्ख हो चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त समिति जहां लोढ़ा सुधारों को लागू करने में लगातार देरी के लिए पदाधिकारियों पर दोष मढ़ रही है, वहीं पदाधिकारियों का मानना है कि राय एंड कंपनी को शीर्ष अदालत ने जो अधिकार सौंपे हैं वे उस दायरे से बाहर निकल रहे हैं.