सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश डीके जैन बीसीसीआई के आचरण अधिकारी और लोकपाल बने रहेंगे क्योंकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने  उनके कार्यकाल को एक साल के लिए बढ़ा दिया है. Also Read - इन चीजों में पाया जाता है कोरोना वायरस से लड़ने की औषधीय क्षमता, जानिए पूरी डिटेल

सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी 2019 में जैन को बीसीसीआई के पहले लोकपाल के रूप में नियुक्त किया था. बाद में उन्हें आचरण अधिकारी की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई. उनका कार्यकाल इस साल 29 फरवरी को समाप्त हो गया था लेकिन उनका अनुबंध पिछले हफ्ते ही बढ़ाया गया. Also Read - Lockdown in Maharashtra: मुंबई के इस इलाके में आज से पूर्ण लॉकडाउन, जानिए क्या खुलेगा?

पिछले सप्ताह संभाला दोबारा कार्यभार  Also Read - 'यदि भारत खेलने के लिए तैयार हो जाए तो हम 23 की जगह 13 मैचों के आयोजन पर विचार कर सकते हैं'

जैन ने पीटीआई को बताया, ‘मैंने पिछले हफ्ते दोबारा काम संभाल लिया. कोविड-19 की स्थिति को देखते हुए आचरण अधिकारी और लोकपाल के रूप में एक और साल का कार्यकाल मिला है. मैं ऑनलाइन सुनवाई करूंगा.’

जैन के पास कुछ मामले लंबित पड़े हैं. उन्होंने मयंक पारिख के खिलाफ हितों के टकराव के आरोपों पर अपना फैसला नहीं सुनाया है. पारिख भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व अधिकारी रहे हैं. उनके खिलाफ एक शिकायत यह भी है कि वह मुंबई के छह क्लब चलाते हैं.

जैन ने कहा, ‘पारिख का मामला लंबित है और जल्द ही इसके निपटारे की उम्मीद है.’ जैन के कार्यकाल की शुरुआत 2019 में लोकेश राहुल और हार्दिक पांड्या के ‘कॉफी विद करण’ विवाद से हुई थी. इन दोनों को ऑस्ट्रेलिया के दौरे के बीच से वापस बुलाया गया था और चैट शो के दौरान महिलाओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने के लिए निलंबित किया गया था.

उन्होंने बीसीसीआई की क्रिकेट सलाह समिति (सीएसी) के पूर्व सदस्यों सचिन तेंदुलकर, अब बीसीसीआई अध्यक्ष सौरव गांगुली और वीवीएस लक्ष्मण से जुड़े ‘हितों के टकराव’ मामले की सुनवाई भी की थी.