कोलकाता: ग्रुप स्‍टेज में तीसरे नंबर पर रहने के बाद क्वार्टर फाइनल की दौड़ से बाहर होने वाले बंगाल ने रणजी ट्रॉफी के क्वालीफाईंग फॉर्मेट की आलोचना की है. बंगाल के खिलाफ ग्रुप स्‍टेज का आखिरी मैच खेलने वाले पंजाब ने भी फॉर्मेट की आलोचना की जबकि बीसीसीआई महाप्रबंधक (क्रिकेट संचालन) सबा करीम ने इसका बचाव किया. दोनों टीमों ने कहा कि फॉर्मेट की खराबी के चलते ही ग्रुप ए से चार जबकि ग्रुप बी से केवल एक टीम क्वालीफाई कर पाई.

नई टीमों के जुड़ने के कारण प्लेट ग्रुप के बनने के बाद करीम के अगुवाई वाले दल ने प्रारूप में बदलाव कर दिया था. सौरव गांगुली की अगुवाई वाली बीसीसीआई की क्रिकेट समिति ने पिछले साल जो प्रारूप पेश किया था, यह उससे अलग था.

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इससे पहले तक ग्रुप ए और बी से तीन-तीन जबकि ग्रुप सी से दो टीमें क्वार्टर फाइनल में पहुंचती थीं. इस बार ग्रुप ए और बी से पांच टीमें, ग्रुप सी से दो और प्लेट चरण से एक टीम अंतिम आठ में पहुंची. ऐसी स्थिति में विदर्भ (29), सौराष्ट्र (29), कर्नाटक (27) और गुजरात (26) ग्रुप ए से क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई जबकि ग्रुप बी से केवल केरल (26) ही अंतिम आठ में पहुंच पाया.

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बंगाल के मेंटर अरुण लाल और पंजाब के कप्तान मनदीप सिंह ने प्रारूप की आलोचना की. बंगाल के 23 अंक हैं और वह ग्रुप बी में तीसरे स्थान पर रहा. पुराने प्रारूप के हिसाब से बंगाल की टीम क्वालीफाई कर जाती. मनदीप ने कहा, ‘‘मैंने कई सीनियर खिलाड़ियों से बात की. मुझे लगता है कि ग्रुप ए और बी से छह टीमें क्वालीफाई करनी चाहिए. उम्मीद है कि वे अगले सत्र में इस पर विचार करेंगे. ए और बी काफी कड़ा ग्रुप है और यहां से छह टीमें क्वालीफाई करनी चाहिए.’’