नई दिल्ली. इंग्लैंड दौरे पर इस बार टीम इंडिया का क्या होगा. क्या एजबेस्टन में टीम इंडिया को पहली टेस्ट जीत मिलेगी. क्या विराट अपनी कप्तानी की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा में खरे उतरेंगे. क्या वो एक दशक से चले आ रहे इंग्लैंड की सरजमीं पर टेस्ट सीरीज जीत के सूखे को खत्म कर पाएंगे. इन तमाम सवालों का बस एक सीधा सा जवाब है- हां. हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि बर्मिंघम में इन सबका शुभ मुहुर्त बन चुका है. इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट के पहले दिन के खेल में जो आंकड़े निकलकर सामने आए हैं उससे साफ हो गया है कि भारतीय टीम विराट कोहली की कप्तानी में इस बार न सिर्फ एजबेस्टन में टेस्ट मैच जीतने वाली पहली एशियाई टीम बनने जा रही है बल्कि टेस्ट सीरीज जीत कर दुनिया भी हिलाने वाली है.

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स्पिनर ने खोला खाता तो जीते सीरीज

एजबेस्टन में जीत का मंत्र आपको बताएं उससे पहले जरा टेस्ट सीरीज जीत की राह कैसे तैयार हुई है वो समझिए. बर्मिंघम टेस्ट के पहले दिन के खेल में भारत को पहली सफलता आर. अश्विन ने कुक का विकेट लेकर दिलाई और इतिहास गवाह है कि इंग्लैंड की धरती पर जब भी पहले टेस्ट में भारत के विकेट लेने का खाता स्पिनर के हाथों खुला है, उसने सीरीज जीती है. इससे पहले साल 1986 के इंग्लैंड दौरे पर लॉर्ड्स में खेले पहले टेस्ट में भारत के विकेट लेने का खाता मनिंदर सिंह ने टॉम रॉबिन्सन को आउट कर खोला था. नतीजा, टीम इंडिया ने 3 टेस्ट मैचों की उस सीरीज को 2-0 से जीता था. साफ है विराट की कप्तानी में इतिहास फिर से खुद को दोहराने को तैयार है.

इंग्लैंड को पहले बैटिंग पड़ेगी भारी!

बहरहाल, अब जब सीरीज जीत का प्लैटफॉर्म सजा है तो धमाका तो करना होगा. और , टीम इंडिया ये धमाका करेगी एजबेस्टन के मैदान पर अपने कभी न टेस्ट जीत पाने के सिलसिले को तोड़कर, जिसमें उसके जीतने पर मुहर तभी लग गई थी जब इंग्लैंड के कप्तान जो रूट ने टॉस जीतकर बल्लेबाजी चुनी थी. अपनी टेस्ट कप्तानी में टॉस जीतने का जो रूट का रिकॉर्ड बेशक शानदार रहा हो लेकिन एजबेस्टन का इतिहास कहता है कि इस मैदान पर पहले बैटिंग हार को दावत देने जैसी है. एजबेस्टन में अब तक पहले बैटिंग करने वाली टीम की जीत का प्रतिशत 31.37 का रहा है. वहीं पहले फील्डिंग करने वाली टीम को 37.25 प्रतिशत मैचों में जीत मिली है.

एजबेस्टन में रचो इतिहास

इंग्लैंड के साथ एजबेस्टन पर खेला जा रहा टेस्ट किसी एशियाई टीम का इस मैदान पर 17वां टेस्ट है. इससे पहले खेले 16 टेस्ट में एशियाई टाम को 12 में हार का सामना करना पड़ा है, जबकि 4 टेस्ट ड्रॉ रहे हैं. मतलब ये कि अब तक बर्मिंघम के ‘टेस्ट’ से एशियाई टीमें फेल होकर ही लौटी है. ऐसे में इस बार भारतीय टीम के सामने एक अच्छा मुहुर्त है, जिसे भुनाकर वो एजबेस्टन मैदान पर टेस्ट जीतने वाली पहली एशियाई टीम बन सकती है.