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- Boxing Women World Boxing Championship Nikhar Zareen Won Gold Medal In 52kg Weight Category Become 5th Indian Women To Do So
महिला बॉक्सिंग: निकहत जरीन ने एक तरफा अंदाज में वर्ल्ड चैंपियनशिप पर जमाया कब्जा
फाइनल मुकाबले में निकहत जरीन ने थाईलैंड की अपनी प्रतिद्वंद्वी को एकतरफा अंदाज में मात दी. अंपायर ने उनके मुक्कों की लय देखकर 5-0 से फैसला उनके हक में दिया.
भारतीय बॉक्सर निकहत जरीन ने गुरुवार को इस्तांबुल में महिला वर्ल्ड चैंपियनशिप के फ्लाइवेट (52kg) वर्ग में थाईलैंड की जिटपोंग जुटामस को 5-0 से हराकर इस खिताब पर एक तरफा अंदाज में कब्जा जमा लिया है. तेलंगाना की इस मुक्केबाज जरीन ने थाईलैंड की प्रतिद्वंद्वी को सर्वसम्मत फैसले से हराया. इस जीत के साथ जरीन विश्व चैंपियन बनने वाली सिर्फ 5वीं भारतीय महिला मुक्केबाज बनीं. 25 वर्षीय इस मुक्केबाज ने बेहतरीन ‘फुटवर्क’ से अपनी प्रतिद्वंद्वी को दूर ही रखा.
छह बार की चैंपियन एमसी मैरीकोम (2002, 2005, 2006, 2008, 2010 और 2018), सरिता देवी (2006), जेनी आरएल (2006) और लेखा केसी इससे पहले विश्व खिताब जीत चुकी हैं.
https://twitter.com/BFI_official/status/1527312606305787905?s=20&t=O_P-4UUIyHtEgGv6LVxohA
जरीन के गोल्ड के अलावा महिला बॉक्सिंग में भारत को मनीषा मौन (57kg) और प्रवीण हुड्डा (63 kg) ने भी ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है. भारत ने इस प्रतियोगिता के लिए 12 सदस्यीय दल यहां भेजा था. पिछली बार की तुलना में इस बार भारत को एक पदक का नुकसान हुआ है. लेकिन 4 साल बाद किसी भारतीय महिला बॉक्सर ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया है.
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Hail the New World Champion 👑@nikhat_zareen 🥊 wins 🇮🇳's 🔟th GOLD 🥇at Women's World Championships at Istanbul, Turkey 🇹🇷Nikhat defeated 🇹🇭's J. Jitpong via a uninanimious decision to win a GOLD 🥳🥳
Heartiest congratulations Champ👏👏#IstanbulBoxing #Boxing pic.twitter.com/bNmEE3lH7g
— SAI Media (@Media_SAI) May 19, 2022
जरीन से पहले दुनिया की महान बॉक्सर में शुमार भारत की एमसी मैरीकॉम ने साल 2018 में 48 किलो भार वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था.
इससे पहले निकहत ने अपने वर्ग में सेमीफाइनल मुकाबला जीतकर फाइनल में जगह बनाई. उन्होंने सेमीफाइनल में ब्राजील की कैरोलिन डि एलमेडा के खिलाफ मुकाबले के दौरान भी उन्होंने 5-0 से ही जीत दर्ज की थी. निकहत ने अपने सभी मैच 5-0 से सर्वसम्मत स्कोर से ही अपने नाम किए. हालांकि मनीषा और परवीन हुड्डा सेमीफाइनल से आगे नहीं बढ़ पाईं और उन्हें कास्य पदक से ही संतोष करना पड़ा.
इस बॉक्सर के लिए यह साल शानदार रहा है. उन्होंने फरवरी में प्रतिष्ठित स्ट्रैंदजा मेमोरियल में दो स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला मुक्केबाज बनी थीं.
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