नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा पर गलवान में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के बाद चीन विरोधी माहौल गर्म है. चार दशक से ज्यादा समय में पहली बार भारत चीन सीमा पर हुई हिंसा में कम से कम 20 भारतीय जवान शहीद हो गए. उसके बाद से चीनी उत्पादों के बहिष्कार की मांग की जा रही है. ऐसे में दुनिया के सबसे अमीर क्रिकेट बोर्ड बीसीसीआई अगले चक्र के लिये अपनी प्रायोजन नीति (स्पॉन्सरशिप पॉलिसी) की समीक्षा के लिए तैयार है. अब बीसीसीआई के बाद दुनिया की सबसे बड़ी खेल लीग में से एक आईपीएल ने भी एक बड़ा कदम उठाया है. Also Read - यूरोपीय संघ और अमेरिका के बाद अब ब्रिटेन ने भी लगाया पाकिस्तान एयरलाइंस पर बैन, नहीं भर सकेगी उड़ानें

शुक्रवार को आईपीएल ने कहा कि वह अपनी स्पॉन्सरशिप डील्स को लेकर अगले सप्ताह एक जरूरी मीटिंग करेगी. इंडियन प्रीमियर लीग की मौजूदा टाइटल प्रायोजक वीवो है जोकि एक चीनी फोन निर्माता कंपनी है. आईपीएल ने शुक्रवार को ट्वीट कर लिखा- “हमारे बहादुर जवानों की शहादत के परिणामस्वरूप हुई सीमा झड़प को ध्यान में रखते हुए आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने आईपीएल के विभिन्न प्रायोजन सौदों की समीक्षा के लिए अगले सप्ताह एक बैठक बुलाई है.” बता दें कि बीसीसीआई को वीवो से सालाना 440 करोड़ रूपये मिलते हैं जिसके साथ पांच साल का करार 2022 में खत्म होगा. Also Read - ममता बनर्जी का बड़ा ऐलान, पश्चिम बंगाल में जून 2021 तक दिया जाएगा गरीबों को मुफ्त राशन

इससे पहले आईपीएल बोर्ड के कोषाध्यक्ष अरूण धूमल का कहना है कि आईपीएल में चीनी कंपनी से आ रहे पैसे से भारत को ही फायदा हो रहा है, चीन को नहीं. उन्होंने कहा, ‘‘जब हम भारत में चीनी कंपनियों को उनके उत्पाद बेचने की अनुमति देते हैं तो जो भी पैसा वे भारतीय उपभोक्ता से ले रहे हैं, उसमें से कुछ बीसीसीआई को ब्रांड प्रचार के लिये दे रहे हैं और बोर्ड भारत सरकार को 42 प्रतिशत कर चुका रहा है. इससे भारत का फायदा हो रहा है, चीन का नहीं.’’

पिछले साल सितंबर तक मोबाइल कंपनी ओप्पो भारतीय टीम की प्रायोजक थी लेकिन उसके बाद बेंगलुरू स्थित शैक्षणिक स्टार्ट अप बायजू ने चीनी कंपनी की जगह ली. धूमल ने कहा कि वह चीनी उत्पादों पर निर्भरता कम करने के पक्ष में हैं लेकिन जब तक उन्हें भारत में व्यवसाय की अनुमति है, आईपीएल जैसे भारतीय ब्रांड का उनके द्वारा प्रायोजन किये जाने में कोई बुराई नहीं है.