नई दिल्ली: टीम इंडिया के तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को बीसीसीआई ने अपने सालाना कॉन्ट्रैक्ट से अलग रखा है. इस पर पू्र्व भारतीय खिलाड़ी और यूपी सरकार में खेल मंत्री चेतन चौहान का कहना है कि बीसीसीआई को शमी का कॉन्ट्रैक्ट नहीं रोकना चाहिए था. उन्होंने कहा कि शमी पर जो भी आरोप लगाए गए हैं उन आरोपों का क्रिकेट से कोई वास्ता नहीं है. इसलिए शमी के भारतीय टीम के साथ कॉन्ट्रेक्ट को नहीं रोकना चाहिए था.

मीडिया से बात करते हुए चेतन ने कहा, ‘मैं समझता हूं कि बीसीसीआई को शमी के अनुबंध को नहीं रोकना चाहिए क्योंकि उन पर जो भी आरोप हैं, उससे क्रिकेट का कुछ लेना-देना नहीं है. यह उनका (शमी) निजी मामला है. अभी तक आरोप भी साबित नहीं हुए हैं.

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शमी की पत्नी हसीन जहां ने उन पर कई गंभीर आरोप लगाए, जिसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है. इस विवाद के सामने आने के बाद शमी का नाम भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की ओर से जारी 26 सदस्यीय सालाना कॉन्ट्रेक्ट की सूची में शामिल नहीं किया गया. इस बार कॉन्ट्रैक्ट में नई कैटेगरी शामिल की गई है. शमी को कॉन्ट्रैक्ट में शामिल नहीं करने की सबसे बड़ी वजह उनकी पत्नी के लगाए आरोपों को माना जा रहा है. हसीन जहां ने शमी पर घरेलू हिंसा और दूसरी महिलाओं से अवैध संबंध रखने का आरोप लगाए हैं.

सालाना अनुबंध की सूची में शमी का नाम नहीं होने के पीछे का कारण उनकी पत्नी द्वारा उन पर लगाए गए आरोप हैं. शमी की पत्नी ने उन पर मारपीट करने और अन्य महिलाओं के साथ अवैध संबंध होने का अरोप लगाया है. पिछले सत्र में शमी को बी-वर्ग में शामिल किया गया था. हाल ही में दक्षिण अफ्रीका में हुई टेस्ट सीरीज में शमी टीम का हिस्सा थे और उन्होंने जोरदार प्रदर्शन भी किया था. ऐसा अमूमन कम ही होता है जब टीम इंडिया के लिए खेलने वाला क्रिकेटर कॉन्ट्रेक्ट से ही बाहर कर दिया जाए.

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इस मसले पर बीसीसीआई के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा था कि बोर्ड ने उनकी पत्नी हसीन जहां द्वारा लगाए गए आरोपों को ध्यान में रखकर उनका नाम रोक दिया. अधिकारी ने कहा कि बीसीसीआई ने मोहम्मद शमी की निजी जिंदगी से जुड़ी तमाम रिपोर्टों पर संज्ञान लिया है. यह पूरी तरह से निजी मामला और बीसीसीआई का इससे कोई लेना देना नहीं है. लेकिन इस मामले से जुड़ी महिला कोलकाता में पुलिस आयुक्त से मिली है तो बीसीसीआई की तरफ से यह विवेकपूर्ण होगा कि वह किसी तरह की आधिकारिक जांच का इंतजार करे.