नई दिल्ली. विराट कोहली की कमान में टीम इंडिया ने ऑस्ट्रेलिया में डबल इतिहास रचा. पहले टेस्ट सीरीज पर कब्जा उसके बाद वनडे सीरीज में धोकर रख दिया. कहने का मतलब ये कि खेल का फॉर्मेट, मिजाज और जर्सी का रंग बदलने के बावजूद भी मैच के नतीजे पर कोई असर नहीं हुआ. हां, मैच को जिताने वाला किरदार जरूर बदल गया. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज में जीत के नायक चेतेश्वर पुजारा बनकर उभरे तो वनडे में ये तमगा धोनी को मिला.

टेस्ट में पुजारा का बेस्ट शो

सबसे पहले बात टेस्ट सीरीज की कर लेते हैं जहां भारत ने ऑस्ट्रेलिया में 2-1 से अपने नाम का डंका पीटा है. भारत की ये ऐतिहासिक फतह टेस्ट स्पेशलिस्ट चेतेश्वर पुजारा के बगैर संभव नहीं थी, जिन्होंने टेस्ट सीरीज की 7 पारियों में सबसे ज्यादा 74.42 की औसत के साथ सबसे ज्यादा 521 रन बनाए. इस दौरान उन्होंने 3 शतक ठोके, जिनमें सबसे बड़ा स्कोर 193 रन का रहा. भारत की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस दमदार प्रदर्शन के लिए पुजारा को मैन ऑफ द सीरीज का अवार्ड मिला.

वनडे में काम आए धोनी के फंडे

पुजारा की तरह ही रोल धोनी ने वनडे सीरीज में प्ले किया और नतीजा भी वही निकला. टीम इंडिया ने 2-1 से 3 वनडे की सीरीज पर कब्जा कर लिया. धोनी ने 3 वनडे की सीरीज में 193 की औसत से 193 रन बनाए. धोनी ने तीनों वनडे में लगातार अर्धशतक जमाए, जिसमें 2 में वो नाबाद रहे. इस सीरीज में धोनी भारत के सबसे सफल बल्लेबाज रहे और इस उम्दा प्रदर्शन के लिए उन्हें मैन ऑफ द सीरीज चुना गया.

विराट के ‘स्पेशल 2’

साफ है क्रिकेट फील्ड पर विराट के लिए पुजारा और धोनी संकटमोचक की तरह हैं. पुजारा को क्रिकेट के लंबे फॉर्मेट में मैदान मारने का हुनर पता है तो धोनी को वनडे फॉर्मेट में. ऑस्ट्रेलिया में दोनों सबसे ज्यादा औसत वाले बल्लेबाज रहे और सबसे बड़ी बात की जिन 2 सीरीज में टीम इंडिया को इन दोनों के दम पर जीत मिली, वो भारतीय क्रिकेट के लिए बेहद खास थी.