टेस्ट क्रिकेट में ‘द न्यू वॉल’ (नई दीवार) के नाम से विख्यात हो चुके भारत के भरोसेमंद बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) टीम इंडिया के लिए वाइट बॉल क्रिकेट भी खेलना चाहते हैं. इस टेस्ट विशेषज्ञ बल्लेबाज ने भारत के लिए 5 वनडे मैच भी खेले हैं. हालांकि इस फॉर्मेट में उनके नाम सिर्फ 51 रन ही दर्ज हैं. उन्होंने आखिरी बार साल 2014 में वनडे मैच खेला था.Also Read - BCCI Annual Contract List 2022: राहणे-पुजारा की ए श्रेणी से होगी छुट्टी !, ये बल्‍लेबाज होंगे प्रमोट

लाल गेंद से बल्लेबाजी में माहिर पुजारा स्पोर्ट्स टुडे से बात कर रहे थे. इस मौके पर उन्होंने बताया, ‘इस बात में कोई संदेह नहीं कि मैं भारत के लिए अभी भी सफेद बॉल क्रिकेट खेलने की तमन्ना रखता हूं. हां, क्योंकि इस समय यह और मुश्किल है, जब कुछ खिलाड़ियों को मैच प्रैक्टिस मिल रही है.’ Also Read - BCCI की नई कॉन्ट्रैक्ट लिस्ट होगी जारी, क्या Ajinkya Rahane और Cheteshwar Pujara बचा पाएंगे अपना ग्रेड

ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गए पुजारा शुरुआती दो टेस्ट में अपनी जानी-पहचानी लय से दूर नजर आए थे. हालांकि बाद के दो टेस्ट मैचों में उन्होंने रन बनाकर खुद को साबित किया. पुजारा ने कहा कि इसके लिए लॉकडाउन जिम्मेदार है. देश में लॉकडाउन लगने के बाद वह बीते 10 महीने (ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले) से क्रिकेट से दूर रहे. इसलिए उन्हें अपनी लय हासिल करने में कुछ वक्त लगा. Also Read - श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज से ड्रॉप होंगे Ajinkya Rahane-Cheteshwar Pujara! इस खिलाड़ी को मिलेगा मौका

33 वर्षीय इस बल्लेबाज ने कहा, ‘लॉकडाउन के बाद ऑस्ट्रेलिया दौरे से पहले मैं किसी भी तरह की मैच प्रैक्टिस नहीं कर पाया. ऐसे इस बड़ी सीरीज के लिए खुद को तैयार कर पाना कुछ मुश्किल था. अगर कोविड नहीं होता तो फिर मैं फर्स्ट क्लास मैचों हो रहे होते और मैं उनमें खेल रहा होता.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन कोविड के चलते कोई भी फर्स्ट क्लास मैच नहीं हो रहे थे, जिनमें मैं खेल पाता. टेस्ट सीरीज की शुरुआत से पहले मैंने बस एक मैच (प्रैक्टिस मैच) खेला था. तो बतौर बल्लेबाज सही लय और एकाग्रता बनाने के लिए यह मुश्किल था.’

उन्होंने कहा कि इसीके चलते मुझे सही लय में आने में वक्त लगा. मैं पहले दो टेस्ट मैच के बाद अपनी लय पकड़ पाया. उन्होंने इसका श्रेय ऑस्ट्रेलियाई टीम को भी दिया, जिसने उनके खिलाफ इस बार अच्छी योजना बना रखी थी. पुजारा ने कहा कि उनका गेम प्लान भंग करना आसान नहीं था लेकिन दो मैच खेलने के बाद मुझे मेरी लय और एकाग्रता वापस मिल गई, मैंने अपने खेल पर भरोसा बनाए रखा और आखिरकार आखिरी दो टेस्ट में मुझे कामयाबी मिली और मैं उनमें रन बना पाया.