नई दिल्ली : प्रशासकों की समिति (सीओए) ने मंगलवार को कहा कि बीसीसीआई के सीईओ राहुल जौहरी के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले की जांच कर रहे स्वतंत्र पैनल को अपनी पहली बैठक में किसी भी तरह का हितों का टकराव नहीं होने की घोषणा करनी होगी. इस कारण से पैनल के एक सदस्य को बदलना पड़ा था. तीन सदस्यीय पैनल के जांच के विषय तय करते हुए सीओए ने कहा कि जांच समिति जौहरी के खिलाफ सभी आरोपों की जांच के लिए स्वतंत्र होगी और वह किसी भी व्यक्ति की बात सुन सकती है जो इस मामले में किसी भी तरह का तथ्य रखने का इच्छुक हो.

सोशल मीडिया पर बिना नाम जाहिर किए डाली गई एक पोस्ट में जौहरी पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया गया था जिसे बाद में हटा दिया गया. सीओए के कारण बताओ नोटिस के जवाब में उन्होंने आरोपों से इनकार किया है. जांच पैनल में शुरुआत में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति राकेश शर्मा, दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष बरखा सिंह और पूर्व सीबीआई निदेशक पीसी शर्मा शामिल थे.

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पीसी शर्मा की जगह हालांकि बाद में वकील वीना गौड़ा ने ली क्योंकि यह बात सामने आई कि उनका एक रिश्तेदार बीसीसीआई का कर्मचारी था. समिति की पहली बैठक मुंबई में होगी लेकिन इसकी तारीख अभी तय नहीं की गई है.

बीसीसीआई वेबसाइट पर समिति के लिए जारी जांच के विषयों के अनुसार, ‘‘पहली बैठक में प्रत्येक सदस्य को घोषणा करनी होगी कि राहुल जौहरी के खिलाफ स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के लिए उनका कोई हितों का टकराव नहीं है.’’

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सीओए ने कहा कि जौहरी के साथ उनके संवाद की सारी जानकारी स्वतंत्र समिति को दी जाएगी. समिति के तीन सदस्यों को प्रत्येक बैठक के लिए एक लाख 50 हजार रुपये दिए जाएंगे और बीसीसीआई से किसी भी तरह की सहायता के लिए बोर्ड की आंतरिक शिकायत समिति की पूर्व प्रमुख करीना कृपलानी से संपर्क किया जा सकेगा.

कृपलानी ने आंतरिक शिकायत समिति के अपने पद से इस्तीफा दे दिया है लेकिन वह कानूनी सलाहकार बनी हुई हैं. सीओए ने कहा कि सूचना मांगने के लिए जल्द ही सार्वजनिक नोटिस जारी किया जाएगा. सोशल मीडिया पर आरोपों के अलावा मुंबई के पूर्व कप्तान शिशिर हट्टनगढी ने भी दावा किया है कि अतीत में जौहरी के कथित दुर्व्यवहार पर उनके पास भी सूचना है.