जब देश का प्रधानमंत्री ही पूर्व क्रिकेटर हो और वो देश को एकमात्र 50 ओवरों का विश्‍व कप जिता चुका हो तो ऐसे में उस देश के क्रिकेट बोर्ड की कहा चलने वाली है. पाकिस्‍तान क्रिकेट में इन दिनों कुछ इसी तरह की हलचल है. प्रधानमंत्री इमरान खान (Imran Khan) के दरवाजे पर इस वक्‍त मुख्‍य चयनकर्ता और कोच मिस्‍बाह उल हक (Misbah Ul Haq) के अलावा टेस्‍ट कप्‍तान अजहर अली (Azhar Ali) और सीनियर खिलाड़ी मोहम्‍मद हफीज (Mohammad Hafeez) पहुंचे  हैं. Also Read - मिसबाह उल हक का अजीब बयान- पश्चिमी देशों के क्रिकेटरों को मानसिक स्वास्थ्य समस्या होने की संभावना ज्यादा

पाकिस्‍तान क्रिकेट बोर्ड के अधिकारियों के पास ऐसे में नाराजगी जाहिर करने के अलावा कोई और रास्‍ता भी नहीं है. घरेलू क्रिकेट में विभागीय टीमों को बहाल करने के लिए ये सीनियर क्रिकेटर बीते दिनों प्रधानमंत्री इमरान खान के दरवाजे पर पहुंचे. खिलाड़ियों के करीबी सूत्रों ने बताया कि पीसीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वसीम खान सोमवार को इन खिलाड़ियों से मिलकर बोर्ड के नीतिगत फैसले के खिलाफ प्रधानमंत्री से मिलने पर नाराजगी जताएंगे. Also Read - आज के दिन, 13 साल पहले धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने जीता था पहला टी20 विश्व कप

मिस्बाह, अजहर और हाफिज ने विभागीय टीमों के खत्म होने के बाद देश भर के क्रिकेटरों को होने वाली समस्याओं पर चर्चा करने के लिए इमरान से समय देने का अनुरोध किया था जिसके बाद इस महीने की शुरुआत में उन्हें मुलाकात के लिए बुलाया गया था. Also Read - मिस्‍बाह पर भड़के अख्‍तर: 'कैसी बातें करता है वो, जिम्‍मेदारी उठाने की जगह बहानेबाजी में लगा है

इस बैठक में पीसीबी के अध्यक्ष एहसान मनी, सीईओ वसीम खान भी उपस्थित थे. इसमें इमरान ने कोच और खिलाड़ियों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि छह प्रांतीय टीमों की प्रथम श्रेणी की नयी प्रणाली जारी रहेगी और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले उसे समय दिया जाना चाहिये.

मनी और वसीम बोर्ड के नीतिगत फैसले को प्रधानमंत्री तक ले जाने से खुश नहीं है. सूत्रों ने बताया कि बोर्ड ऐसे बर्ताव कर रहा जैसे उसकी जानकारी के बगैर ही इन खिलाड़ियों ने इमरान खान से मुलाकात की, जो सही नहीं है.

‘‘ बोर्ड के प्रमुख संरक्षक खुद प्रधानमंत्री है और यह कैसे संभव है कि बोर्ड की जानकारी के बिना वह मिस्बाह तथा अन्य खिलाड़ियों से मिलेंगे. अगर बोर्ड को इसकी जानकारी नहीं थी तो पीसीबी के दो वरिष्ठ अधिकारी भी इस बैठक में कैसे शामिल हुए?’’