भारत की पीवी संधु ने रियो ओलम्पिक में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। ऐसे में उस व्यक्ति के बारे में जानना बहुत जरूरी है जिसकी मेहनत इस उपलब्धि के पीछे साफ झलकती है। जी हाँ. हम बात कर रहे हैं पुलेला गोपीचंद की। पुलेला गोपीचंद भारत के एक ऐसे कोच हैं जिन्होंने बैडिमिंटन को नई ऊँचाईयों पर पहुँचाया है। खुद गुरु द्रोणाचार्य का रोल निभाते हुए साइना नेहवाल और पीवी सिंधू जैसे अर्जुन को तैयार किया जिन्होंने दुनिया में भारत का नाम रौशन किया है। रियो ओलम्पिक के बैडमिंटन फाइनल में आज भारत की पीवी संधु स्वर्ण पदक के लिए खेलेंगी। इससे पहले साइना ओलम्पिक में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। पुलेला गोपीचंद किसी परिचय के मोहताज नहीं लेकिन उनके शिष्यों की उपलब्धि पर आज उनके बारे में भी बात करना जरूरी है। Also Read - Swiss Open 2021: स्विस ओपन के फाइनल में एकतरफा मुकाबले में मारिन से हारीं विश्व चैम्पियन पीवी सिंधु

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पुलेला गोपीचंद एक प्रतिभावान बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं। अपने कैरियर में उन्होंने संघर्षों के बावजूद कई मेडल जीते। तमाम मुश्किलों के बावजूद गोपीचंद को अर्जुन अवार्ड और द्रोणाचार्य पुरस्कार से भी नवाजा गया है। गोपीचंद के जो सपने अधूरे रह गए थे वो उन्होंने कोच बनकर साकार किया। उन्होंने जब अपनी अकादमी शुरू की थी तो कहा जा रहा था कि सिस्टम के आगे वो हार जाएंगें लेकिन उन्होंने सबको गलत साबित किया और देश के सबसे अच्छे बैडमिंटन कोच साबित हुए।

पुलेला गोपीचंद को जीवन में काफी संघर्ष करना पडा। जब उन्होंने अपनी अकादमी शुरू करनी चाही तो आंध्र प्रदेश सरकार ने उन्हें जमीन तो दे दी लेकिन प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे। उन्होंने इसके लिए अपना घर गिरवी रख दिया। उससे कुछ पैसे जुटाए फिर एक व्यापारी ने भी मदद की। आज गोपीचंद की तारीफ करने वाला सरकार और कार्पोरेट घरानों में किसी ने उस वक्त उनका साथ नहीं दिया।

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एकबार गोपीचंद ने कहा था कि जब मैं संन्यास लूँगा तो मुझे खुशी महसूस होगी क्योंकि मैं जो करना चाहता हूँ वो मैं कर चुका। उन्होंने अपने बच्चों पर भरोसा जताते हुए कहा था कि मुझे इन बच्चों पर यकीन है कि वो बेहतर करेंगे और देश के लिए मेडल लेकर आएँगें। सिर्फ साइना और सिंधू नहीं बल्कि श्रीकांत किदांबी, पी कश्यप, गुरुसाई दत्त, तरुण कोना जैसे खिलाड़ी भी गोपीचंद के शिष्य रहे हैं। एकबार उनकी पत्नी ने एक इंटरव्यू में कहा था कि गोपीचंद अपने काम को लेकर इतने समर्पित हैंं कि बहुत कम होता है जब वो अकादमी से समय पर घर आते हों। देश को इतने सफल बैडमिंटन खिलाड़ी देने के लिए हम पी गोपीचंद का आभार व्यक्त करते हैं। पीवी सिंधु के शानदार प्रदर्शन के लिए उन्हें विशेष बधाई।