मुंबई क्रिकेट के ‘द्रोणाचार्य’ कहलाने वाले कोच वासु परांजपे (Vasoo Paranjape) का 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. भारतीय क्रिकेट खासकर मुंबई क्रिकेट के साथ छह दशक तक परांजपे विभिन्न भूमिकाओं में जुड़े रहे. वह कोच, चयनकर्ता, मेंटर और सलाहकार रहे. मुंबई क्रिकेट की नब्ज को उनके जैसा कोई नहीं पढ पाता था. सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) को ‘सनी’ उपनाम उन्होंने ही दिया था.Also Read - शास्त्री के बाद अनिल कुंबले या वीवीएस लक्ष्मण बन सकते हैं टीम इंडिया के नए कोच

वासु परांजपे दादर यूनियन टीम के कप्तान रहे जहां से सुनील गावस्कर और दिलीप वेंगसरकर जैसे धुरंधर निकले. 1987 विश्व कप से पहले मुंबई में भारतीय टीम की तैयारी के लिये लगाये गए शिविर की देखरेख की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई थी. परांजपे के परिवार में पत्नी ललिता, दो बेटियां और बेटा जतिन है जो भारत का पूर्व क्रिकेटर और राष्ट्रीय चयनकर्ता रह चुका है. Also Read - 35 साल बाद भी Sunil Gavaskar ने नहीं खोली क्रिकेट अकादमी, अब महाराष्ट्र के मंत्री ने दी चेतावनी

म्पियन क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने मशहूर कोच वासु परांजपे को श्रृद्धांजलि देते हुए उन्हें सर्वश्रेष्ठ कोचों में से एक बताया जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने खेला है. तेंदुलकर ने एक बयान में कहा, ‘‘वासु सर सर्वश्रेष्ठ कोचों में से एक थे जिनके मार्गदर्शन में मैने खेला है.वह बचपन से क्रिकेट के मेरे सफर के अभिन्न अंग रहे और कई मायनों में मेरे मेंटर रहे.’’ Also Read - Sunil Gavaskar को है शक, कहीं टी20 विश्‍व कप में भी प्‍लेइंग-XI से महरूम ना रह जाएं Ravichandran Ashwin

उन्होंने कहा, ‘‘मेरे कैरियर की शुरूआत में वह मुझसे मराठी में कहते थे कि पहले 15 मिनट देखो और विरोधी टीम पूरे मैच में तुम्हे देखेगी. वह काफी मजाकिया थे और क्रिकेट का उन्हें अपार ज्ञान था. कुछ महीने पहले ही मैं उनसे मिला था और वह उसी मजाकिया अंदाज में मिले थे.’’

वासु परांजपे ने भारतीय क्रिकेट खासकर मुंबई क्रिकेट के साथ छह दशक तक परांजपे विभिन्न भूमिकाओं में जुड़े रहे. वह कोच, चयनकर्ता, मेंटर और सलाहकार रहे. मुंबई क्रिकेट की नब्ज को उनके जैसा कोई नहीं पढ़ पाता था. सुनील गावस्कर को ‘सनी’ उपनाम उन्होंने ही दिया था.