केवल विश्व युद्ध के समय रद्द हुए ओलंपिक खेलों को जब कोरोना वायरस महामारी की वजह से रद्द कर दिया गया तो लोगों को इसकी गंभीरता का एहसास हुआ। विश्व भर में तेजी से फैल रहे वायरस के खिलाफ लड़ाई फिलहाल हर देश की सरकार की प्राथमिकता है, ऐसे में खेल या दूसरे आयोजनों के बारे में सोचना स्वार्थी होगा। ऐसा कहना है भारतीय दिग्गज हरभजन सिंह का। Also Read - Viral Post of Dr Manisha Jadhav: कोविड से जंग हारने वाली डॉक्टर का संदेश- ये संभवतः मेरा अंतिम गुड मॉर्निंग है और फिर...

भारतीय टीम के सीनियर स्पिनर ने एएनआई से बातचीत में कहा, “ईमानदारी से कहूं तो पिछले 15 दिनों में मेरे दिमाग में क्रिकेट आया तक नहीं। देश के सामने क्रिकेट बहुत छोटी चीज है। अगर मैं अभी क्रिकेट और आईपीएल के बारे में सोचूंगा तो मैं स्वार्थी हूं।” Also Read - दिल्ली ने 'लूट' लिया हरियाणा का ऑक्सीजन टैंकर, आरोप लगा बोले अनिल विज- अब साथ भेजेंगे पुलिस एस्कॉर्ट

उन्होंने कहा, “स्वस्थ और फिट भारत हमारी प्राथमिकता होना चाहिए। अगर हम स्वस्थ और सुरक्षित होंगे तो ही खेल आयोजित हो पाएंगे। क्रिकेट अभी मेरे विचार में भी नहीं है। ये समय एकजुट होने और इस देश को वापस अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए आप जो कुछ भी कर सकते हैं, वो करने की कोशिश करने का है।” Also Read - COVID-19 Vaccine Cost In Private: अब प्राइवेट में 250 में नहीं लगेगा कोरोना का टीका, देने पड़ सकते हैं 1000 रुपये

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 21 दिनों के लॉकडाउन का ऐलान करने के बाद सबसे ज्यादा मुश्किल प्रवासी मजदूरों को आ रही है। जिनके पास ना तो दूसरे शहर में रहने-खाने के पैसे और ना ही घर लौटने का कोई रास्ता, क्योंकि लॉकडाउन की वजह से उनका काम भी बंद हो गया है और बस-ट्रेन के आवागमन पर भी रोक लग गई है। हरभजन ने सरकार से इन लोगों की मदद करने की अपील की।

उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि घोषणा करने से पहले प्रवासी मजदूरों के हालातों को ध्यान में रखा जाना चाहिए था। उनके पास रहने को घर नहीं है, खाना नहीं है और पैसा कमाने के लिए काम नहीं है। सरकार को उनका ख्याल करना चाहिए था और ये निश्चित करना चाहिए था कि उनके पास खाना और पैसे हों। लेकिन अब वो घर वापस जाना चाहते हैं। जिस तरह से हालात को नियंत्रित किया गया है उसे देखकर दुख हो रहा है।”

हरभजन ने आगे कहा, “किसी ने भी नहीं सोचा था कि स्थिति इतनी गंभीर हो जाएगी और शहरों को लॉकडाउन करना पड़ेगा। चीजें इतनी तेजी से बदलीं कि सरकार को भी उनके बारे में सोचना का समय नहीं मिला। मुझे उम्मीद है कि हमारे पास नागरिकों की सुरक्षा के लिए स्मार्ट तरीके से निर्णय लेने का समय है। मैं समझता हूं कि लोग अपने घर क्यों जाना चाहते हैं क्योंकि वे अपने लोगों के साथ रहना चाहते हैं।”