धोनी की विकेटकीपिंग का हर कोई कायल है. उनके अंदाज की पूरी दुनिया दीवानी है. क्रिकेट की किताब में भी कीपिंग के जिन फॉर्मूलों का जिक्र है, धोनी का स्टाइल उससे बिल्कुल अलग है. यही वजह है कि अब क्रिकेट की समझ और परख रखने वाले लोग धोनी स्टाइल ऑफ कीपिंग की थ्योरी पर रिसर्च करना चाहते हैं.

क्रिकेट के गलियारों में धोनी स्टाइल ऑफ कीपिंग को माही वे का नाम दिया गया है. टीम इंडिया के फील्डिंग कोच आर. श्रीधर का मानना है कि भारतीय क्रिकेट की सफलता में धोनी की कीपिंग का बड़ा योगदान रहा है. इससे मैच में भी बड़ा फर्क पड़ता है. उन्होंने कहा,”धोनी की कीपिंग का अपना अंदाज है, इसलिए वो इतने सफल हैं. ‘माही वे’ के नाम से मशहूर उनके कीपिंग के तरीके पर हमें रिसर्च करना चाहिए.”

कीपिंग के अपने अनोखे अंदाज के साथ धोनी आज ना सिर्फ भारत के सबसे सफल कीपर हैं बल्कि दुनिया के भी बेस्ट विकेटकीपर्स में शुमार हो चुके हैं. इंटरनेशनल क्रिकेट में धोनी ने अब तक 771 शिकार किए हैं. जिसमें 598 कैच औक 173 स्टंपिंग दर्ज है. वर्ल्ड क्रिकेट में वो सर्वाधिक स्टंपिंग करने वाले विकेट कीपर हैं. वनडे क्रिकेट में धोनी 400 से ज्यादा शिकार करने वाले भारत के पहले विकेट कीपर हैं. जबकि, इस मामले में वो दुनिया के चौथे विकेटकीपर हैं.

आर. श्रीधर के मुताबिक धोनी की विकेटकीपिंग स्पिन गेंदबाजी पर और भी खतरनाक हो जाती है. उन्होंने कहा,”स्पिन गेंदबाजी हो तो विकेटकीपिंग में धोनी से बेस्ट कोई हो ही नहीं सकता. उनके हाथों की स्पीड, उनकी स्टंपिंग देखने लायक होती है. इसीलिए,हम उसे ‘माही वे’ कहते हैं.”

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विकेट के पीछे धोनी ने अपना 400वां वनडे शिकार साउथ अफ्रीका के खिलाफ मौजूदा सीरीज में ही पूरा किया है. अफ्रीकी पिचों पर चहल और कुलदीप की सफलता में भी धोनी की सोच और उनके विकेटकीपिंग के अंदाज का बड़ा हाथ रहा है. दरअसल, विकेट के पीछे खड़े होकर धोनी सिर्फ जबरदस्त कीपिंग ही नहीं करते बल्कि विरोधी बल्लेबाजों की खामियों को पकड़कर अपने गेंदबाजों को ये सुझाव भी देते हैं कि उन्हें कैसी गेंद डालनी है. इससे ना सिर्फ गेंदबाज को विकेट मिलती है बल्कि उससे टीम को भी फायदा होता है.

साफ है, विकेटकीपिंग का माही वे अपनी नई मिसाल गढ़ चुका है. यही वजह है कि अब इस पर रिसर्च किए जाने जैसी भी बाते क्रिकेट के महकमों में जोर पकड़ने लगी हैं.