भारतीय सलामी बल्‍लेबाज मयंक अग्रवाल (Mayank Agarwal) ने न्‍यूजीलैंड के खिलाफ जीत में अहम भूमिका निभाई. जहां एक तरफ भारत और कीवी बल्‍लेबाज स्पिनर्स को खेलने के दौरान जूझते दिखे. वहीं, ऐसी पिच पर अग्रवाल ने पहली पारी में 150 और दूसरी पारी में 62 रन ठोक दिए. मयंक ने मैच के बाद कहा कि तकनीक हमेशा सर्वश्रेष्‍ठ नहीं होती. अच्‍छी तकनीक से हमेशा रन बनाने की गारंटी नहीं मिलती. संघर्ष करने की प्रतिबद्ता अहम होती है.Also Read - IND vs SA: करारी शिकस्‍त देने के बावजूद ग्रीम स्मिथ ने टीम इंडिया-BCCI को कहा शुक्रिया, जानें क्‍या है वजह ?

ये लगातार 12वीं बार है जब न्‍यूजीलैंड की टीम ने भारत का दौरा किया है और टेस्‍ट सीरीज में उन्‍हें हार के साथ वापस स्‍वदेश लौटना पड़ा है. इससे पहले आखिरी बार कीवियों ने भारत को साल 1988 में भारत की धरती पर टेस्‍ट सीरीज हराई थी. Also Read - IND vs SA: Virushka की बेटी Vamika की तस्वीर वायरल, Anushka Sharma संग बोले विराट- न शेयर करें तस्वीर

मयंक अग्रवाल (Mayank Agarwal) ने मैच के बाद कहा, ‘‘रन बनाकर अच्छा महसूस होता है और यह पारी मेरे लिए विशेष है. कानपुर की तुलना में मैंने कुछ भी बदलाव नहीं किया. मैं सिर्फ मानसिक अनुशासन और प्रतिबद्धता के साथ खेला.’’ Also Read - IND vs SA 3rd ODI: राष्‍ट्रगान के दौरान विराट कोहली चिंगम खाते आए नजर, भड़के फैन्‍स

30 साल के इस बल्लेबाज ने कहा कि वह किसी भी पारी में शतक के बारे में नहीं सोच रहे थे लेकिन दूसरी पारी में 60 रन से अधिक के स्कोर को उन्हें शतक में बदलना चाहिए था, ‘‘तकनीक हमेशा सर्वश्रेष्ठ नहीं होती, इससे रन बनाने की गारंटी नहीं मिलती लेकिन संघर्ष करने की प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण होती है. दक्षिण अफ्रीका में अलग तरह की चुनौती होगी, एक टीम के रूप में हम उसका लुत्फ उठाएंगे. हम इसे लेकर उत्सुक हैं.’’

कानपुर में पहले टेस्ट में 13 और 17 रन की पारियां खेलने वाले अग्रवाल (Mayank Agarwal) ने कहा कि मुख्य कोच राहुल द्रविड़ ने उन्हें कहा था कि अपनी तकनीक में बदलाव नहीं करो. ‘‘राहुल भाई ने मुझे कहा कि श्रृंखला के बीच में तकनीक के बारे में सोचने का कोई मतलब नहीं है. इसी तकनीक के साथ तुमने रन बनाए हैं, मानसिक रूप से खुद को मजबूत रखो, अपनी रणनीति पर कायम रहो और रन अपने आप बनेंगे.’’

सुनील गावस्कर (Sunil Gavaskar) से मिली सलाह पर अग्रवाल ने कहा, ‘‘सनी सर ने मुझे कहा था कि शुरुआत में बल्ला नीचा रखो, बायें कंधे को थोड़ा बाहर की तरफ रखकर खेलो… इससे मदद मिली.’’