नई दिल्ली: अपने हेयर स्‍टाइल और कलर को लेकर अक्‍सर चर्चा में रहने वाले भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पांड्या बपचन से ही इसके शौकीन हैं. बपचन में उन्‍हें इसके लिए अक्‍सर झूठ बोलना पड़ता था, पिटाई भी होती थी लेकिन अपनी शरारतों से वे बाज नहीं आते थे. Also Read - कप्तान से पहले बल्लेबाजी करने उतरने पर खुद भी हैरान थे सैम कर्रन, कहा- जीनियस हैं धोनी

भारतीय क्रिकेट टीम के हरफनमौला खिलाड़ी हार्दिक पांड्या बचपन में भी अपने बालों को कलर कराने के बहुत शौकीन थे और इसके लिए उन्हें अपने कोच और मम्मी से बहाना भी बनाना पड़ता था. हार्दिक अपने बालों के स्टाइल को लेकर खासे चर्चा में रहते हैं. इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 11वें संस्करण में वह एक अलग ही अंदाज में नजर आ रहे हैं. उनका यह शौक शुरू से ही था जिसका उन्होंने अब खुलासा किया है. Also Read - IPL 2020: चेन्नई के खिलाफ हार के बाद कप्तान रोहित शर्मा ने बताए हार के कारण

हार्दिक ने आईपीएल की टीम मुंबई इंडियंस की ओर से सोशल मीडिया पर पोस्ट एक वीडियो में अपने बचपन की यादों को बयान किया है. हार्दिक ने वीडियो में कहा, “मैं शुरू से ही अलग था. 11 साल का था तभी अपने बाल कलर करवा लिए थे. इसके लिए घर पर आकर मम्मी से मार भी खाता था और फिर जाकर कुछ और करके आता था. बालों को लेकर कोच को उलटे सीधे बहाने बताता था. कोच जब मुझसे पूछते थे कि ये क्या है, तो मैं कहता था कि बाल कटाने गया था तो कलर मेरे ऊपर गिर गया.” Also Read - युवाओं का मार्गदर्शन करने के लिए अनुभवी खिलाड़ियों की जरूरत: एमएस धोनी

24 साल के हार्दिक ने भारत के लिए अब तक छह टेस्ट, 38 वनडे और 30 टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले हैं. उन्होंने कहा, “मैं बहुत ज्यादा शैतानी करता था. लोगों से हमेशा झगड़ता रहता था और कभी दोस्त नहीं बनाता था. हम दोनों भाइयों (बड़े भाई कृणाल पांड्या) ने हमेशा मम्मी को बहुत परेशान किया. मैंने कृणाल को भी बहुत परेशान किया है. मेरे वजह से कृणाल के कभी दोस्त नहीं बनते थे क्योंकि मैं अगर झगड़ा करता था तो उसे अपनी दोस्ती तोड़नी पड़ती थी.”

हरफनमौला खिलाड़ी ने अक्टूबर 2016 में धर्मशाला में न्यूजीलैंड के खिलाफ वनडे में पदार्पण किया था जबकि जनवरी 2016 में एडिलेड में आस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली बार टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच में उतरे थे. उन्होंने इस वर्ष जनवरी में दक्षिण अफ्रीका दौरे पर अपना पहला टेस्ट खेला था.

हार्दिक ने कहा, “मैं और कृणाल डब्ल्यूडब्ल्यूई फाइट खेलते थे और इस दौरान हमने कई बेड तोड़े हैं. सबसे बड़ी समस्या यह थी कि खेलते-खेलते हम दोनों वास्तव में झगड़ा कर लेते थे. जो एटिट्यूड लोगों में 16-17 साल में आते हैं, वह हमारे अंदर 12 साल में ही आ गया था. हालांकि समय के साथ सीखा कि गुस्सा हर चीज का हल नहीं होता है. गुस्से से जीवन में नकारात्मकता आती है. मैं कोशिश करता हूं कि मेरे गुस्से से किसी का दिल न दुखे.”

इनपुट: एजेंसी