क्रिकेट दुनिया का सबसे चर्चित व पसंदीदा खेल है पूरे विश्व में इस खेल के लोग दीवाने हैं। क्रिकेट खेल है कौशल का ,ये खेल है तजुरबे का, इस खेल में नाम के साथ ही साथ खिलाड़ी को पैसों के साथ एक बेहतर करियर भी मिलता है। रिटायरमेंट के बाद भी ये क्रिकेटर इस खेल से जुड़े होते है। ये ढेरों माध्यम से इस खेल से जुड़े होते है जिनमे कुछ तो क्रिकेट कमेन्ट्री करते है तो कोई सलाहकार व कोई क्रिकेट मैनेजर और कोई क्रिकेट कोच बन के क्रिकेट के साथ जुड़ा रहता है। ये क्रिकेट कोच ही होते है जो अपने बेहतर ज्ञान से युवा क्रिकेटरों को बेहतर क्रिकेट ख़िलाड़ी बनने का सबक देते हैं। अपने अनुभवों के आधार पर ये टीम के खिलाड़ियों को एक बेहतरीन खिलाड़ी बनाते हैं। आइए जानते है ऐसे ही कुछ क्रिकेट कोच के बारे में जिन्होंने अपने ज्ञान और अनुभव से क्रिकेट के खेल को आगे बढ़ाया –Also Read - हम अक्सर सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी को कप्तान बनाने में जल्दबाजी कर देते हैं: पैडी अप्टन

अनिल कुंबलेAlso Read - Team India Coach: भारतीय टीम के कोच बनना चाहते हैं यह ऑस्ट्रेलियाई ऑलराउंडर

Anil-Kumble-of-India-in-acAlso Read - IPL 2021, PBKS vs RR: टीम की हार से निराश कोच Anil Kumble, बोले- करीबी अंतर से मैच गंवाना Punjab Kings के लिए चलन बन गया है

17 अक्टूबर 1970 को जन्में भारतीय टीम के जम्बों यानि अनिल कुंबले को साल 2016 में टीम इंडिया का नया कोच बनाया गया। टीम इंडिया के बेहतरीन स्पिनर अनिल कुंबले के नाम ढ़ेरों रिकॉर्ड हैं ये भारत की तरफ से पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने 500 विकेट अपने नाम किया है। इसके साथ ही साथ ये टीम इंडिया के टेस्ट कप्तान भी रह चुके हैं।  टेस्ट में 619 विकेट इनके नाम है. वहीं एक टेस्ट मैच में इन्होंने 74 रन देकर 10 विकेट लिए थे।

डेव व्हाटमोर-

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डेवनल फ्रेड्ररिक वॉटमोर का जन्म 16 मार्च, 1954 कोलंबो, श्रीलंका में हुआ था। ये पूर्व अन्तर्राष्ट्रीय आस्ट्रेलियाई क्रिकेट खिलाड़ी हैं और वर्तमान समय मे बांग्लादेश क्रिकेट टीम के कोच है। अपने छोटे अन्तर्राष्ट्रीय करियर मे उन्होने मार्च 1979 से जनवरी 1980 तक 7 टेस्ट मैच और 1 एकदिवसीय मैच खेला। फर्स्ट क्लास क्रिकेट मे उन्होने विक्टोरिया के लिए 6,000 से ज्यादा रन बनाए।

अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट से 1988/89 मे संयास लेने के बाद वे क्रिकेट कोच बन गए। उन्होने श्रीलंका की क्रिकेट टीम को दो अलग समय मे कोच किया, जिसमे पहले समय मे श्रीलंका की टीम ने 1996 क्रिकेट विश्व कपजीता। उन दो अंतराल के मध्य मे उन्होने लैन्कशायर की टीम को कोच किया। जहाँ उनकी टीम ने 1998 और 1999 मे नैशनल लीग और 1998 की नैट्वेस्ट ट्राफी जीती। ये बांग्लादेश क्रिकेट टीम के कोच  भी थे।

बॉब वूल्मर –

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पाकिस्तान के क्रिकेट कोच बॉब वूल्मर का जन्म भारत के कानपुर शहर में 14 मई 1948 को हुआ था। दाएँ हाथ से बल्लेबाज़ी और मध्यम गति की गेंदबाज़ी करने वालेरॉबर्ट एंड्रयू वूल्मर ने 1975 में इंग्लैंड की टीम से अपने टेस्ट क्रिकेट जीवन की शुरुआत की थी।
बाब वूल्मर का निधन 18 मार्च 2007 को वेस्ट इंडीज़ में हुआ।

बॉब वूलमर काफी विख्यात और शायद सबसे ज्यादा प्रसिद्ध किर्केट कोच थे। इस वज़ह से वह दो टीमों, दक्षिण अफ्रीका एवं पाकिस्तान के कोच बने और दो अन्य टीमों (इंग्लैंड एवं वेस्ट इंडीज) ने उन्को अपना कोच बनाने की कोशिश की। साथ ही वह एक बेहतरीन खिलाड़ी भी थे जिनको कैरी पैकर ने वर्ल्ड सीर्ई ज़ क्रिकेट के लिये साइन किया।

जॉन राइट-

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पूर्व न्यूजीलैंड के बाए हाथ के बल्लेबाज और क्रिकेट कोच जॉन राइट ने 82 टेस्ट मैच और 149 एकदिवसीय क्रिकेट खेले हैं । इसके साथ ही साथ ये न्यूज़ीलैण्ड टीम के कप्तान भी रह चुके है इन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 5334 रन बनाए हैं और एकदिवसीय क्रिकेट में 3891 रन 26.46 के औसत में बनाये है ये सन 2000 से 2005 तक भारतीय राष्ट्रीय टीम के कोच भी रह चुके है । इनके समय भारतीय टीम ने विश्व कप 2003 के फाइनल में पहुंचा था और ऑस्ट्रेलिया से घरेलु टेस्ट सीरीज भी जीती थी । इसके साथ ही साथ ये 2013के आईपीएल में मुंबई इंडियन टीम के क्रिकेट कोच भी रह चुके है।

टॉम मूडी-

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पूर्व ऑस्ट्रलियाई दाएँ हाथ के बल्लेबाज और अंतरास्ट्रीय कोच टॉम मूडी ने 8 टेस्ट मैच और 76  एकदिवसीय मैच खेले है। इसके साथ ही साथ इन्होंने विश्व कप के दो फाइनल मैच 1987 और 1999 के मैच खेले है । ये सन 2005 में श्रीलंका के कोच भी रह चुके है। इसके साथ ही साथ ये 2013 के आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के कोच भी रह चुके है इसके साथ ही साथ ये चैनल नाइन और चैनल टेन में बेहतरीन कमेंटेटर भी रह चुके है।

गैरी किर्स्टन-

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23 नवम्बर 1967 को केप टाऊन में जन्म भूतपूर्व दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेटर और भारतीय क्रिकेट टीम के कोच भी थे। मुख्यतः सलामी बल्लेबाज के रूप में उन्होंने 1993 और 2004 के बीच दक्षिण अफ़्रीका के लिए 101 टेस्ट मैच और 185 एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले। किर्स्टन ने 1993 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ़ मेलबोर्न में अपने टेस्ट कैरियर का श्रीगणेश किया। 2004 में न्यूज़ीलैंड में अपनी अंतिम पारी में मैच जीतने वाले शानदार 76 रन बनाने के बाद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले लिया।

उन्होंने टेस्ट क्रिकेट और एक दिवसीय क्रिकेट दोनों में एक दमदार बल्लेबाज होने के रूप में ख्याति प्राप्त की। वह एक विश्वसनीय क्षेत्ररक्षक भी थे। जैक्स कालिस द्वारा तो़ड़े जाने से पहले टेस्ट कैरियर में सबसे अधिक रन और शतक बनाने वाले दक्षिण अफ़्रीकी होने के दोनो रिकॉर्ड किर्स्टन के थे। इनके समय भारतीय टीम ने 2011 का विश्व कप जीता था।