भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली की अगुआई वाली टीम इंडिया ने 2000 दशक की शुरुआत में घरेलू सीरीज 2-1 से जीतने के बाद ऑस्ट्रेलिया में चार मैचों की सीरीज 1-1 से ड्रॉ  कराई. इसके अलावा बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने पास बरकरार रखी थी. गांगुली भारत के सबसे सफल कप्तानों में से एक हैं जिन्होंने 49 टेस्ट मैचों में से 21 में जीत दर्ज की जिनमें 11 मैच विदेशी धरती पर जीते. Also Read - कोहली-तेंदुलकर समेत भारतीय क्रिकेटरों ने एयर इंडिया विमान क्रैश पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की

इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर डेविड लॉयड का कहना है कि गांगुली भारतीय टीम के बदलाव लाने के लिए ‘उत्प्रेरक’ बने तो ‘बेपरवाह’विराट कोहली उसे अगले स्तर तक ले गए. क्रिकेटर से कमेंटेटर बने लॉयड 2000 के दशक के शुरू में भारत और ऑस्ट्रेलिया की टेस्ट प्रतिद्वंद्विता के संदर्भ में बात कर रहे थे. Also Read - ‘सौरव गांगुली के रिटायर होने के बाद ही मुझे मौके मिले’: युवराज सिंह ने किया खुलासा

उन्होंने सोनी टेन पिट स्टॉप कार्यक्रम में कहा, ‘मैं गांगुली का बहुत बड़ा प्रशंसक हूं. मेरा मानना है कि सौरव गांगुली ने टीम में यह बात भरी कि अब तेज गेंदबाज हम पर मनमाफिक हावी नहीं रहेंगे क्योंकि हम अपने खुद के कुछ अच्छे खिलाड़ी ढूंढ रहे हैं.’ Also Read - विराट कोहली की मौजूदगी में बिना दबाव के बल्लेबाजी कर सकता हूं: चेतेश्वर पुजारा

‘गांगुली ने उत्प्रेरक का काम किया’

लॉयड ने कहा, ‘हमेशा से यह माना जाता रहा कि भारत विदेश में उछाल वाली गेंदों को पसंद नहीं करता लेकिन गांगुली की अगुवाई में टीम उछाल वाली पिचों पर खेलने के लिए पूरी तैयारियों के साथ ऑस्ट्रेलिया गई थी.’

उन्होंने कहा, ‘बेशक भारत के खिलाफ उसकी सरजमीं पर खेलना बहुत मुश्किल होता है लेकिन शुरू से यह माना जाता रहा कि भारत के खिलाफ विदेशी धरती पर आपके पास मौका होता है. गांगुली ने उत्प्रेरक का काम किया और टीम में राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ी भी थे.’

‘कोहली खुद के लिए नहीं बल्कि टीम के लिए  रन बनाता है’

लॉयड ने कहा कि वर्तमान में कोहली टीम को नए स्तर पर ले गए हैं. उन्होंने कहा, ‘वह (कोहली) बेहतरीन खिलाड़ी तो है ही बहुत अच्छे नेतृत्वकर्ता भी हैं. वह कभी हार नहीं मानता और उसे किसी चीज का खौफ नहीं होता है. यह महत्वपूर्ण है कि वह डरता नहीं है.’ लॉयड ने कहा, ‘कोहली के बारे में मेरा मानना है कि वह मैच जीतने के लिए मैदान पर उतरता है. वह खुद के लिए रन नहीं बनाता वह वहां मैच जीतने के लिए होता है और आगे बढ़कर नेतृत्व करता है.’