नई दिल्ली : भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा आयोजित कराए गए रणजी कॉनक्लेव में घरेलू टीमों के कप्तानों और प्रशिक्षकों ने रणजी ट्रॉफी में निर्णय समीक्षा प्रणाली (डीआरएस) लागू करने और टॉस में सिक्के के इस्तेमाल को खत्म करने के सुझाव दिए हैं. बीते साल रणजी ट्रॉफी में खराब अंपायरिंग को लेकर कई मामले उठे थे. ऐसी उम्मीद की जा रही थी कॉनक्लेव में अंपायरिंग को लेकर बात की जाएगी.

डीआरएस अभी तक सिर्फ अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में ही लागू किया जाता है, लेकिन बीते सीजन मैचों की संख्या बढ़ने के कारण कप्तान और प्रशिक्षकों ने मौजूदा तकनीक के साथ इसे घरेलू सत्र में लागू करने का सुझाव दिया है. बीते सीजन रणजी ट्रॉफी सेमीफाइनल में कर्नाटक के खिलाफ सौराष्ट्र के बल्लेबाज चेतेश्वर पुजारा को तब नॉट आउट दिया गया था जब गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर कैच कर ली गई थी. इस मैच में पुजारा ने शतक जमाया था और इससे मैच का परिणाम बदल गया था.

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इसके अलावा टॉस को समाप्त कर मेजबान टीम को बल्लेबाजी/गेंदबाजी चुनने की आजादी देने का प्रस्ताव भी रखा गया. घरेलू सत्र में चूंकि अब 37 टीमें हो गई हैं ऐसे में दलीप ट्रॉफी, ईरानी ट्रॉफी को बनाए रखने को लेकर भी चर्चा हुई और इस पर कप्तानों तथा प्रशिक्षकों से सुझाव मांगे गए. इनके अलावा खेल के स्तर में सुधार, इसे लेकर सुझाव, गेंद की गुणवत्ता, धीमी ओवर गति जैसे मुद्दों पर भी बात हुई.

बीसीसीआई इस समय एड-हॉक समिति द्वारा चलाई जा रही है. इन सभी सुझावों के लिए बीसीसीआई की तकनीकी समिति का मंजूरी जरूरी होगी और इसके बाद आम बैठक में भी मंजूरी चाहिए होगी. इन दोनों में से कोई भी समिति इस समय असित्तव में नहीं हैं.

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बीसीसीआई कोषाध्यक्ष अनिरुद्ध चौधरी ने कहा, “भारतीय क्रिकेट का पूरा ढांचा घरेलू क्रिकेट, खिलाड़ियों, कप्तानों, प्रशिक्षकों, सपोर्ट स्टाफ और राज्य संघों पर टिका हुआ है. इन सभी का रोल उतना ही अहम है जितना उन खिलाड़ियों का जो राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व करते हैं.” उन्होंने कहा, “कॉनक्लेव का मकसद खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों की बातों को सुनना था. हम उनके सुझावों की कद्र करते हैं.”