Mahendra Singh Dhoni announces retirement from international cricket: भारत को सभी ICC ट्रॉफी जिताने वाले पूर्व भारतीय कप्तान एमस धोनी ने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास ले लिया है. दो बार के विश्व कप विजेता भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने शनिवार को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहकर पिछले एक साल से उनके भविष्य को लेकर लग रही अटकलों पर विराम लगा दिया. धोनी ने 15 अगस्‍त को 74वें स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर अंतरराष्‍ट्रीय क्रिकेट से संन्‍यास की घोषणा की. उन्होंने अपने सोशल मीडिया पर एक 4 मिनट लंबा वीडियो पोस्ट कर कहा कि उन्हें अब रिटायर समझा जाए. धोनी ने अपने इंस्टाग्राम पर लिखा ,‘‘अब तक आपके प्यार और सहयोग के लिये धन्यवाद. शाम सात बजकर 29 मिनट से मुझे रिटायर्ड समझिये.’’ Also Read - व्हाइट मोनोकिनी में आजादी का जश्न मना रही हैं अलाया, तस्वीरें देख उड़ जाएंगे होश

एमएस धोनी को क्रिकेट का सबसे महान कप्तानों में से एक माना जाता है और यकीनन भारत के सबसे महान कप्तानों में से एक धोनी का सफर रोमांच से भरा रहा. अब जब ये 37 वर्षीय पूर्व कप्तान इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह रहा है तो इसके नाम में सम्मान और अनेकों उपलब्धियों का एक गौरवान्वित कर देने वाला पिटारा जुड़ा है. गैर पारंपरिक शैली में कप्तानी और मैच को अंजाम तक ले जाने की कला के साथ महानतम क्रिकेटरों की जमात में खुद को शामिल करने वाले धोनी के इस फैसले के साथ ही क्रिकेट के एक युग का भी अंत हो गया. Also Read - 1000 करोड़ रुपए का पोंजी घोटाला: CBI ने पूर्व मंत्री के आवास समेत 8 जगहों पर मारा छापा

विश्व क्रिकेट में धोनी का आगमन ऐसे समय हुआ था जब भारत के कई विकेटकीपर मैदान में आ रहे थे, लेकिन एक बार जब धोनी आ गए, तो उन्होंने अगले 15 वर्षों के लिए इस मौके को अपना बना लिया. बिजली की रफ्तार के साथ विकेट के पीछे कमाल और विस्फोटक बल्लेबाजी में माहिर धोनी ने अपनी माइंड पॉवर के साथ खेल को पढ़ने की क्षमता विकसित की. इसका नतीजा ये निकला की उन्होंने भारतीय मध्य-क्रम में जल्द ही सामंजस्य बैठा लिया. तत्कालीन कप्तान सौरव गांगुली के समर्थन के साथ धोनी ने जल्द ही मौके का पूरा उपयोग किया. धोनी हमेशा हार्ड हिटर थे. पाकिस्तान के खिलाफ उनके 143 और श्रीलंका के खिलाफ 183 की पारी ने लोगों को उन्हें एडम गिलक्रिस्ट के साथ तुलना करने के लिए मजबूर कर दिया. Also Read - Bihar Assembly Elections 2020: बिहार चुनाव में कैसे वोट डालेंगे कोरोना के मरीज? निर्वाचन आयोग का बड़ा फैसला

हालाँकि, अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में 17266 रन बनाने के बावजूद, धोनी को एक बल्लेबाज के रूप में उनकी कप्तानी के लिए अधिक याद किया जाएगा. कहते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ बल्लेबाज फीका पड़ गया, लेकिन उनका दिमाग समझदार होता गया. जैसे-जैसे वह क्रिकेट से दूर गए, भारत के पास विराट कोहली जैसा युवा बल्लेबाज आया जो धोनी के साये में अपनी कप्तानी की क्षमता को विकसित करने में कामयाब रहा.

बतौर कप्तान धोनी बहुत मुश्किल समय में टीम में आए थे. कैरेबियाई देश में में 2007 के विश्व कप में हार के बाद, भारतीय क्रिकेट में कुछ बड़े बदलाव की जरूरत थी, और यह बदलाव युवा, लंबे बालों वाले धोनी के पास था, जिनके पास दबाव को संभालने और कठिन हालातों में बल्लेबाजी करने की बेहतरीन कला थी. 2007 के टी 20 विश्व कप को जीतना और फिर ऑस्ट्रेलिया में जाकर उसे हराना, सीमित ओवरों के क्रिकेट में धोनी के कारनामों की बस शुरुआत भर थी. इसके बाद जैसे ही अनिल कुंबले गए उसके बाद धोनी को सभी प्रारूपों का कप्ताना बनना पड़ा.

धोनी के अंडर में, भारत इतिहास में पहली बार 2009 में विश्व नंबर 1 टीम बना. भारत ने न्यूजीलैंड में एक श्रृंखला भी जीती. जहां गांगुली ने 2000 के दशक की शुरुआत में सफलता की नींव रखी और द्रविड़ ने 2007 में इंग्लैंड में जीत हासिल की तो वहीं धोनी ने टीम को एक कदम और आगे बढ़ाया. अब तक भारतीय टीम को घर में हराना लगभग असंभव सा हो गया था. धोनी ही वह शख्स रहे जिसने अगली पीढ़ी को आश्वस्त किया कि भारतीय क्रिकेट अच्छे हाथों में है और यह आगे बढ़ रहा है.

2011 में जब भारत ने विश्वकप उठाया तो धोनी की कप्तानी ने नई ऊंचाइयों को छुआ. रवि शास्त्री की कमेंट्री …. और वर्ल्ड कप 2011 के फाइनल में धोनी का वो लॉन्ग-ऑन पर विजयी शॉट… आज भी भारतीयों के दिलों में है. लेकिन ये कप्तान यहीं नहीं रुका. 2013 में, धोनी के अंडर में, भारत ने इंग्लैंड में 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीती, इस प्रकार, वह तीनों आईसीसी टूर्नामेंट जीतने वाले एकमात्र कप्तान बने. हालांकि, 2014 के अंत में, 90 टेस्ट खेलने के बाद, धोनी ने खेल के सबसे लंबे प्रारूप से रिटायरमेंट ले लिया और सीमित ओवरों के क्रिकेट पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए कप्तानी विराट कोहली को सौंप दी.

धोनी ने बिना किसी शोर-शरावे के टेस्ट कैप उतार दी. हालांकि एकदिवसीय मैचों में, उन्होंने भारत को 2015 विश्व कप के सेमीफाइनल में पहुंचाया, लेकिन अंत में चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराने में विफल रहे. लेकिन, रंगीन कपड़ों में भारत का दबदबा खत्म नहीं हुआ, मेन इन ब्लू 2016 में वर्ल्ड टी 20 के सेमीफाइनल में पहुंचे और जनवरी 2017 में कोहली को कप्तानी सौंपने से पहले दुनिया की नंबर 1 टीम बन गई. इसके बाद अब बारी थी 2019 वर्ल्ड कप की, लेकिन इस बार धोनी की बैटिंग में वो पैनापन नजर नहीं आया. कभी इस खेल का सबसे बड़ा फिनिशर, धोनी ने वर्ल्ड कप में अपनी रफ्तार से ही मात खा गया.

धोनी ने भारत के लिये आखिरी मैच न्यूजीलैंड के खिलाफ विश्व कप सेमीफाइनल खेला था. विकेटों के बीच बेहतरीन दौड़ के लिये मशहूर धोनी उस तनावपूर्ण मैच में 50 रन बनाकर रनआउट हो गए थे. ‘रांची का यह राजकुमार’ हालांकि क्रिकेट के इतिहास में महानतम खिलाड़ियों में अपना नाम दर्ज करा गया है. भारत के लिये उन्होंने 350 वनडे, 90 टेस्ट और 98 टी20 मैच खेले. कैरियर के आखिरी चरण में वह खराब फार्म से जूझते रहे जिससे उनके भविष्य को लेकर अटकलें लगाई जाती रही.

उन्होंने वनडे क्रिकेट में पांचवें से सातवें नंबर के बीच में बल्लेबाजी के बावजूद 50 से अधिक की औसत से 10773 रन बनाये. टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 38 . 09 की औसत से 4876 रन बनाये और भारत को 27 से ज्यादा जीत दिलाई. आंकड़ों से हालांकि धोनी के कैरियर ग्राफ को नहीं आंका जा सकता. धोनी की कप्तानी, मैच के हालात को भांपने की क्षमता और विकेट के पीछे जबर्दस्त चुस्ती ने पूरी दुनिया के क्रिकेटप्रेमियों को दीवाना बना दिया था.

वह कभी जोखिम लेने से पीछे नहीं हटे. इसलिये 2007 टी20 विश्व कप का आखिरी ओवर जोगिंदर शर्मा जैसे नये गेंदबाज को दिया जो 2011 वनडे विश्व कप के फाइनल में फार्म में चल रहे युवराज सिंह से पहले बल्लेबाजी के लिये आये. दोनों बार भारत ने खिताब जीता और धोनी देशवासियों के नूरे नजर बन गए. आईपीएल में तीन बार चेन्नई को जिताकर वह ‘थाला’ कहलाये.