कोविड-19 महामारी के कारण देशव्यापी लॉकडाउन में एथलीट आउटडोर प्रैक्टिस नहीं कर पा रहे हैं. इस समय दुनिया भर के खिलाड़ी अपने घरों में कैद होने को मजबूर हैं. खिलाड़ी अपने घर में ही प्रैक्टिस कर रहे हैं और खुद को फिट रखने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में भारतीय क्रिकेट टीम के विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा के पिता प्रशांत अभ्यास में अपने बेटे की मदद कर रहे हैं.Also Read - वीरेंद्र सहवाग ने शेयर किया वैकल्पिक नंबर, बोले- शॉवर में गिरकर खराब हो गया है फोन, फैन्‍स कंफ्यूज

प्रशांत साउथ सिटी के अपने अपार्टमेंट में रिद्धिमान की विकेटकीपिंग ड्रिल में मदद कर रहे हैं जिससे कि उनका हाथ और आंखों का सामंजस्य बना रहे. Also Read - इंग्लैंड में टीम इंडिया को भुवनेश्वर कुमार जैसे स्विंग गेंदबाज की जरूरत: युवराज सिंह

साहा ने पीटीआई से कहा, ‘मेरे अपार्टमेंट के अंदर में भी ड्रिल संभव है, मैं वह कर रहा हूं. इसलिए मैं आखों और हाथों के सामंजस्य वाली कई ड्रिल करता हूं जो विकेटकीपरों के लिए बेहद जरूरी हैं. कभी कभी मैं दीवार पर सॉफ्टबॉल मारता हूं और फिर गेंद को कैच करता हूं जिससे कि क्रिकेट खेलने का अहसास बना रहे.’ Also Read - खिलाड़ियों का मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करना सकारात्मक चीज है: जेम्स एंडरसन

‘फ्लैट के अंदर मेरी मदद करते हैं’

उन्होंने कहा, ‘कभी-कभी मेरे पिता (प्रशांत साहा) भी फ्लैट के अंदर मेरी मदद करते हैं.’ क्या फ्लैट के अंदर कूदने और कैच का अभ्यास करने के लिए पर्याप्त जगह है? साहा भाग्यशाली हैं कि उनके घर में ऐसा है.

साहा ने कहा, ‘हां, मैं दोनों तरफ मूव कर सकता हूं और कैच पकड़ सकता हूं.’ यह पूछने पर कि क्या यह ब्रेक कंधे की सर्जरी के कारण 2018-2019 के ब्रेक की तरह है, साहा ने कहा कि यह उस समय से बेहतर है.

भारतीय राष्ट्रीय टीम के स्ट्रैंथ एवं अनुकूलन कोच निक वेब ने सभी के लिए व्यक्तिगत ट्रेनिंग कार्यक्रम तैयार किया है. साहा ने कहा कि उनके पास कुछ उपकरण हैं लेकिन अपार्टमेंट के अंदर परिवार की मौजूदगी में नियमित वर्जिश कर पाना संभव नहीं है.

आईपीएल में खेलने पर है नजर 

भारत को अगली टेस्ट श्रृंखला दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलनी है और साहा की नजरें इससे पहले घरेलू क्रिकेट या इंडियन प्रीमियर लीग में खेलने पर टिकी हैं.

उन्होंने कहा, ‘अगर मुझे मैच खेलने को मिलते हैं तो यह अच्छा रहेगा लेकिन यह सब कुछ उस समय की स्थिति पर निर्भर करेगा. आपको अब भी नहीं पता कि यात्रा करना सुरक्षित है या नहीं. उम्मीद करता हूं कि शिविर शुरू करने से पहले सभी चीजों का ध्यान में रखा जाएगा.’