2030 के फुटबॉल वर्ल्ड कप में 64 टीमों पर विचार, क्या होंगे फायदे और नुकसान | Explained

Written By: : Nandan Singh
Updated Date:August 1, 2026 1:55 PM IST

FIFA World Cup New Plan: 64 टीमों का फुटबॉल वर्ल्ड कप होने से ज्यादा देशों को खेलने का मौका तो मिलेगा और कमाई बढ़ सकती है. मगर इसके कई नुकसान भी है.

  • फीफा वर्ल्ड कप 2030 में बदलाव की बात
  • 48 टीम से 64 टीम करने पर विचार
  • दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल संस्था ने दिया सुझावा
  • फीफा कर रहा है प्लान पर स्टडी

FIFA World Cup New Plan: फुटबॉल का सबसे बड़ा मंच FIFA वर्ल्ड कप एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर सकता है. बताया जा रहा है कि फीफा 2030 वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 48 से बढ़ाकर 64 करने पर विचार कर रहा है. अगर ऐसा होता है तो ये वर्ल्ड कप इतिहास का सबसे बड़ा टूर्नामेंट बन जाएगा. इस सुझाव का दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल संस्था CONMEBOL ने 2030 वर्ल्ड कप की 100वीं सालगिरह को देखते हुए इस विस्तार का समर्थन किया है. वहीं, UEFA, AFC और Concacaf जैसे संगठनों ने टूर्नामेंट के आकार और फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई है. लोगों और विशेषज्ञों के मन में अब सवाल उठ रहा है कि क्या ज्यादा टीमें आने से फुटबॉल और ज्यादा वैश्विक बनेगा या फिर इस खेल की गुणवत्ता और खिलाड़ियों पर दबाव बढ़ जाएगा. फीफा इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से स्टडी करा रहा है.

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FIFA वर्ल्ड कप में 64 टीमें खेलेंगी?

फुटबॉल का सबसे बड़ा टूर्नामेंट फीफा वर्ल्ड कप अब तक लगातार विस्तार करता रहा है. पहले इसमें 32 टीमें खेलती थीं, लेकिन 2026 वर्ल्ड कप से टीमों की संख्या बढ़ाकर 48 कर दी गई है. अब 2030 वर्ल्ड कप के लिए इसे और बढ़ाकर 64 टीमों तक ले जाने का प्रस्ताव सामने आया है. यह प्रस्ताव दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल संस्था CONMEBOL की ओर से रखा गया था. साल 2030 वर्ल्ड कप फुटबॉल इतिहास के 100 साल पूरे होने का विशेष आयोजन होगा, इसलिए CONMEBOL इसे और बड़ा बनाने के पक्ष में है. हालांकि, फीफा ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है. उसने एक स्वतंत्र एजेंसी से स्टडी कराने को कहा है ताकि यह समझा जा सके कि 64 टीमों का टूर्नामेंट प्रतियोगिता की गुणवत्ता, खिलाड़ियों की थकान, मैच शेड्यूल, आयोजन व्यवस्था और कमाई पर क्या असर डालेगा.

64 टीमों खेलेंगी तो क्या होगा

अगर वाकई 2030 के वर्ल्ड कप में 64 टीमें खेलेंगी तो छोटे और कम रैंक वाले देशों को भी दुनिया के सबसे बड़े मंच पर खेलने का मौका मिलेगा. यही इसका सबसे बड़ा फायदा माना जा रहा है. कई देशों के लिए वर्ल्ड कप में पहुंचना अब तक बहुत मुश्किल रहा है. अगर टीमों की संख्या बढ़ती है तो इंडोनेशिया, सूरीनाम, न्यू कैलेडोनिया और ताहिती जैसे देशों के लिए भी क्वालिफाई करने की संभावना बढ़ सकती है. इस पर फीफा का तर्क है कि अगर छोटे देशों को विश्व कप खेलने का वास्तविक मौका मिलेगा तो वे अपने फुटबॉल ढांचे, युवा खिलाड़ियों और राष्ट्रीय टीमों में ज्यादा निवेश करेंगे.

फुटबॉल का स्तर और बढ़ेगा

इस प्रस्ताव के विस्तार का जो समर्थन कर रहे हैं. उनका कहना है कि पहले यह डर था कि ज्यादा टीमें आने से मुकाबले कमजोर हो जाएंगे. लेकिन 48 टीमों वाले नए फॉर्मेट में छोटे देशों ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया. केप वर्डे और कांगो DR जैसी टीमों ने दिखाया कि फुटबॉल अब सिर्फ कुछ बड़े देशों तक सीमित नहीं है. कई छोटे देश भी बड़े मंच पर प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता रखते हैं. इससे फीफा को लगता है कि 64 टीमों के टूर्नामेंट में भी अच्छी प्रतिस्पर्धा देखने को मिल सकती है.

ज्यादा कमाई का मौका

बड़ा टूर्नामेंट मतलब ज्यादा मैच और ज्यादा दर्शक. 48 टीमों के मुकाबले 64 टीमों के टूर्नामेंट में मैचों की संख्या बढ़ जाएगी. प्रस्तावित फॉर्मेट में 128 मुकाबले हो सकते हैं, जो 48 टीमों वाले टूर्नामेंट से 24 ज्यादा होंगे. इससे फीफा को टीवी राइट्स, विज्ञापन, स्पॉन्सरशिप और टिकट बिक्री से ज्यादा कमाई की उम्मीद है. फीफा पहले ही 2027-2030 चक्र के लिए लगभग 14 अरब डॉलर के बजट का अनुमान लगा रहा है. बड़े टूर्नामेंट से यह कमाई और बढ़ सकती है.

प्रस्ताव के खिलाफ तर्क

64 टीमों वाले प्रस्ताव के जो आलोचक हैं उनका मानना है कि इससे टूर्नामेंट की गुणवत्ता कम हो जाएगी. वर्ल्ड कप का स्तर प्रभावित होगा. उनका कहना है कि अगर बहुत ज्यादा कमजोर टीमें शामिल होती हैं तो कई मुकाबले एकतरफा हो सकते हैं. इससे टूर्नामेंट की प्रतिष्ठा और रोमांच पर असर पड़ सकता है. हालांकि 48 टीमों के अनुभव ने इस चिंता को कुछ हद तक कम किया है, लेकिन 64 टीमों को लेकर अभी भी सवाल बने हुए हैं.

इंफोग्राफिक/notebooklm

खिलाड़ियों पर बढ़ेगा दबाव

फुटबॉल कैलेंडर पहले ही काफी व्यस्त है. क्लब फुटबॉल, घरेलू लीग, चैंपियंस लीग और अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों के कारण खिलाड़ियों पर लगातार दबाव रहता है. अगर वर्ल्ड कप में टीमों और मैचों की संख्या बढ़ती है तो टूर्नामेंट लंबा होगा और खिलाड़ियों को ज्यादा समय तक खेलना पड़ेगा. UEFA जैसे संगठन पहले ही बड़े और ज्यादा बार होने वाले टूर्नामेंट को लेकर चिंता जता चुके हैं. उनका मानना है कि इससे खिलाड़ियों की फिटनेस और पूरे फुटबॉल कैलेंडर पर असर पड़ सकता है.

अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर पर दबाव

एक बड़ा वर्ल्ड कप आयोजित करने के लिए ज्यादा दिन, ज्यादा स्टेडियम और ज्यादा यात्रा की जरूरत होगी. इसका असर क्लबों और घरेलू लीगों पर पड़ सकता है क्योंकि खिलाड़ियों को लंबे समय तक अपनी राष्ट्रीय टीमों के साथ रहना होगा. फुटबॉल संगठनों के बीच पहले से ही मैचों की संख्या को लेकर विवाद चलता रहा है. ऐसे में 64 टीमों का टूर्नामेंट नई चुनौतियां पैदा कर सकता है.

मेजबान देशों को किस तरह का फायदा होगा

बड़े टूर्नामेंट से मेजबान देशों में स्टेडियम, होटल, परिवहन और पर्यटन क्षेत्र को फायदा मिल सकता है. 2030 वर्ल्ड कप पहले ही कई देशों में आयोजित होने वाला है. बड़ी संख्या में आने वाले प्रशंसकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा मिलने की उम्मीद है. हालांकि इसके लिए बड़े खर्च की जरूरत भी होगी.

छोटे देशों के लिए क्या फायदा

वर्ल्ड कप में 64 टीमों का सबसे बड़ा असर क्वालिफिकेशन पर पड़ेगा. छोटे देशों को वर्ल्ड कप में पहुंचने का ज्यादा मौका मिलेगा. फुटबॉल विकास के लिए प्रेरणा मिलेगी. युवा खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे. लेकिन दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि बड़ी टीमों के लिए क्वालिफाई करना आसान हो सकता है. इससे क्षेत्रीय क्वालिफायर मुकाबलों का महत्व कम हो सकता है.

2026 वर्ल्ड से क्या सीख मिली

साल 2026 के 48 टीमों वाले वर्ल्ड कप में छोटे देशों ने बेहतर प्रदर्शन किया. इससे साबित हुआ कि फुटबॉल का स्तर कई देशों में तेजी से बढ़ रहा है. 48 टीमों वाले फॉर्मेट में ग्रुप स्टेज को लेकर सवाल उठे थे. हालांकि 64 टीमों के फॉर्मेट में 16 ग्रुप और हर ग्रुप से सिर्फ दो टीमों के आगे बढ़ने का विकल्प इस समस्या को कम कर सकता है. (इनपुट: reuter)

इससे जुड़े सवाल और उनके छोटे जवाब यहां मिलेंगे:

FIFA 2030 वर्ल्ड कप में कितनी टीमें करने पर विचार कर रहा है?

FIFA 2030 वर्ल्ड कप में टीमों की संख्या 48 से बढ़ाकर 64 करने के प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

64 टीमों का प्रस्ताव किसने दिया था?

यह प्रस्ताव दक्षिण अमेरिकी फुटबॉल संस्था CONMEBOL की ओर से दिया गया था.

FIFA विस्तार क्यों करना चाहता है?

फीफा ज्यादा देशों को मौका देने, फुटबॉल को वैश्विक स्तर पर बढ़ाने और आर्थिक अवसरों को बढ़ाने की संभावनाओं का अध्ययन कर रहा है.

64 टीमों के वर्ल्ड कप का सबसे बड़ा फायदा क्या होगा?

छोटे और कम रैंक वाले देशों के लिए वर्ल्ड कप में पहुंचने के मौके बढ़ जाएंगे.

टूर्नामेंट के विस्तार का सबसे बड़ा विरोध क्या है?

आलोचकों को डर है कि इससे खिलाड़ियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, कैलेंडर प्रभावित होगा और प्रतियोगिता की गुणवत्ता कम हो सकती है.

क्या FIFA ने 64 टीमों वाले फॉर्मेट को मंजूरी दे दी है?

नहीं, फीफा अभी इसकी समीक्षा कर रहा है और अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा.

48 से 64 टीमों के प्लान पर जाने से कितने मैच बढ़ सकते हैं?

प्रस्तावित फॉर्मेट में मैचों की संख्या बढ़कर 128 हो सकती है. यह 48 टीमों वाले फॉर्मेट से 24 ज्यादा मैच होंगे.

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