नई दिल्ली: रूस में हो रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप का खुमार दुनियाभर में लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है, फैंस अपने पसंदीदा खिलाड़ियों और टीम्स के मैच देखने के लिए उत्साहित हैं लेकिन रूस की एक सीनियर सांसद की चिंता कुछ और है. रूस में बच्चों, महिलाओं और परिवारों के लिए संसद की समिति की प्रमुख तमारा प्लैटनयोवा ने कहा है कि रूस में वर्ल्ड कप के दौरान रूसी महिलाओं को अश्वेत यानी काले विदेशियों के साथ संबंध नहीं बनाने चाहिए क्योंकि ऐसा करने पर वो महिलाएं सिंगल मदर बन जाएंगी और उनका बच्चा भी श्वेत यानी गोरा न होकर मिक्सड ब्रीड का होगा जिससे आगे चलकर उन्हें समस्या आ सकती है. प्लैटनयोवा ने कहा कि जो रूसी महिलाएं विदेशियों से शादी करती हैं आमतौर पर वो शादी भी टूट ही जाती है.

चिल्ड्रेन ऑफ ओलंपिक
प्लैटनयोवा ने ये बातें एक रेडियो स्टेशन पर ‘चिल्ड्रेन ऑफ ओलंपिक’ के बारे में चर्चा करते हुए कहीं. ‘चिल्ड्रेन ऑफ ओलंपिक’ शब्द 1980 में मॉस्को ओलंपिक के बाद चर्चा में आया था. इस शब्द का इस्तेमाल सोवियत यूनियन के समय किया जाता था. तब रूसी महिलाओं द्वारा अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के लोगों के साथ संबंध बनाने पर हुए अश्वेत बच्चों के लिए इसे इस्तेमाल किया जाता था. ऐसे बच्चों को अपने रंग के चलते रूस में भेदभाव का सामना करना पड़ा है.

अश्वेत बच्चों से भेदभाव
प्लैटनयोवा ने कहा, ”हमें अपने बच्चों को जन्म देना चाहिए, मिक्सड ब्रीड के बच्चे सोवियत यूनियन के समय से ही रूस में भेदभाव का शिकार रहे हैं और आगे भी होते रहेंगे.” प्लैटनयोवा ने आगे कहा, ”बच्चों का श्वेत होना एक बात है और अश्वेत होना अलग बात है, मैं राष्ट्रवादी नहीं हूं लेकिन मैं जानती हूं कि ऐसा होने से सबसे ज्यादा परेशानी बच्चों को ही होती है, ऐसे बच्चों को छोड़ दिया जाता है और फिर उन्हें बिना पिता के सिर्फ सिंगल मदर के साथ रहना पड़ता है.”

31 देशों से आए हैं फैंस
प्लैटनयोवा के अलावा एक और सांसद ने कहा है कि फुटबॉल वर्ल्ड कप के दौरान रूसियों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि वर्ल्ड कप देखने के लिए रूस आने वाले विदेशी लोग अपने साथ वायरस ला सकते हैं जिससे रूसी लोग प्रभावित हो सकते हैं. गुरुवार से शुरू हुए फुटबॉल वर्ल्ड कप में 31 देशों से हजारों फैंस रूस पहुंच चुके हैं. वर्ल्ड कप में पहला मैच मेजबान रूस और सऊदी अरब की टीम के बीच है.