इंग्लैंड के पूर्व तेज गेंदबाज स्टीव हर्मिसन ने अपनी आत्मकथा स्पीड डेमंस में खुलासा किया है कि अपने करियर के दौरान वह डिप्रेशन से जूझ रहे थे और एक समय ऐसा भी आया जब वह आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगे थे.Also Read - 'ये टेस्ट क्रिकेट के अंत की शुरूआत' ; मैनचेस्टर टेस्ट रद्द होने पर बोले पूर्व इंग्लिश दिग्गज

अपनी आत्मकथा में हर्मिसन ने बताया है कि 2004 में वह अपने डिप्रेशन की समस्या से निपटने के लिए एक साइकोलॉजिस्ट के पास गए थे. उन्होंने लिखा है कि लंबे विदेशी दौरे उनकी अवसाद की वजह थे. लेकिन घरेलू सीरीज के दौरान भी ये समस्या उनका पीछा करती रहती थी. Also Read - पूर्व इंग्लिश गेंदबाज का दावा- मौजूदा भारतीय टीम साल 2000 की ऑस्‍ट्रेलियाई टीम जैसी मजबूत

हमर्सिन ने उस दौर के बारे में लिखा है, ‘वर्ष 2004 के महान समर सीजन में जब मैं नंबर एक गेंदबाज था और इंग्लैंड की टीम लगातार सात टेस्ट मैच जीत चुकी थी. लेकिन समय बीतने के साथ मुझे चमक अंधेरे में तब्दील होती महसूस होने लगी. भयावह सच्चाई ये थी कि विदेशी दौरों पर मुझे परेशान करने वाली भावनाएं फिर से मुझे अपने लपेटे में ले रही थी और इस बार इनका घर से दूर रहने से कुछ लेनादेना नहीं था. डिप्रेशन ने मुझे घर पर एक बेहद कामयाब इंग्लिश सीजन के दौरान जकड़ लिया था.’ Also Read - हमेशा एक धोखेबाज के रूप में याद रखे जाएंगे स्मिथ: हार्मिंसन

इस 38 वर्षीय क्रिकेटर ने इंगलैंड के लिए खेले अपने 63 टेस्ट मैचों में 226 विकेट और 58 वनडे में 76 विकेट झटके. एक समय उन्हें दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाजों में से एक माना जा रहा था. लेकिन डिप्रेशन की समस्या की वजह से उनका करियर महज साल साल में खत्म हो गया. उन्होंने 2002 में अपना पहला टेस्ट भारत के खिलाफ खेला था लेकिन महज सात साल में 2009 में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपने करियर का आखिरी टेस्ट खेला और 2013 में क्रिकेट को अलविदा कह दिया था.