भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व गोलकीपर प्रशांत डोरा (Prasanta Dora) का 44 साल की उम्र में निधन हो गया. उन्हें काफी लंबे समय से बुखार आ रहा था, बाद में दिसंबर में पता चला कि वह हेमोफैगोसिटिक लिम्फोहिस्टोसाइटोसिस (HLH) रोग से पीड़ित हैं. उनके परिवार में पत्नी और 12 साल का बेटा है. HLH रोग में शरीर की इम्युनिटी बुरी तरह से प्रभावित होती है, जो संक्रमण या कैंसर जैसी बीमारियों का कारक हो सकता है.Also Read - भारतीय फुटबॉल टीम को एशिया के टॉप 10 में लाना होगा: सुनील छेत्री

डोरा के बड़े भाई और भारतीय टीम और मोहन बागान के पूर्व गोलकीपर रहे हेमंत ने कहा कि डॉक्टरों को उनके इस रोग का पता करने में काफी लंबा समय लगा. परिवार उन्हें लगातार खून दे रहा था. लेकिन वह बच नहीं पाए और मंगलवार दोपहर 1 बजकर 40 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली. भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) ने भी डोरा के निधन पर शोक व्यक्त किया है. Also Read - ISL 2020: आज नॉर्थईस्ट युनाइटेड से भिडे़गी मुंबई सिटी, कब और कहां देखें मैच की LIVE Streaming

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हेमंत ने पीटीआई को बताया, ‘उनके प्लेटलेट्स में काफी कमी आ गई थी और चिकित्सकों ने इस रोग का पता करने में लंबा समय लिया. बाद में उनका टाटा मेडिकल (न्यूटाउन स्थित कैंसर संस्थान) में इलाज चल रहा था.’

हेमंत और प्रशांत भारत की तरफ खेलने वाली भाइयों की मशहूर जोड़ियों में शामिल थे. प्रशांत ने 1999 में थाईलैंड के खिलाफ डेब्यू किया तथा उन्होंने सैफ कप और सैफ खेलों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था. उन्हें 1997-98 और 1999 में संतोष ट्रॉफी में सर्वश्रेष्ठ गोलकीपर आंका गया था. उन्होंने टॉलीगंज अग्रगामी की तरफ से अपने करियर की शुरुआत की तथा कलकत्ता पोर्ट ट्रस्ट, मोहम्मडन स्पोर्टिंग, मोहन बागान और ईस्ट बंगाल की तरफ से भी खेले.

इनपुट : भाषा