नई दिल्ली. वर्ल्ड फुटबॉल में जर्मनी की टीम का एक सुनहरा इतिहास रहा है. लेकिन इसके बावजूद चार बार के वर्ल्ड चैम्पियन रहे जर्मनी का फीफा वर्ल्ड कप 2018 के ग्रुप स्टेज से बाहर होना पहले से फिक्स था. डिफेंडिंग चैंपियन जर्मनी की टूर्नामेंट से विदाई पहले से तय थी. जर्मनी को ग्रुप स्टेज के आखिरी मैच में दक्षिण कोरिया के हाथों 2-0 से शिकस्त झेलनी पड़ी और इसी के साथ रूस में खेले जा रहे फुटबॉल वर्ल्ड कप में उसके सफर पर भी विराम लग गया. एशिया की उभरती टीम साउथ कोरिया के हाथों जर्मनी की अप्रत्याशित हार से हर कोई दंग था. ये बात किसी फुटबॉल फैंस के गले के नीचे नहीं उतर रही थी कि मौजूदा चैंपियन जर्मनी अब फीफा वर्ल्ड कप 2018 में खेलती नहीं दिखेगी. लेकिन हम आपको बता दें कि जितना बड़ा उलटफेर साउथ कोरिया के हाथों जर्मनी का हारकर टूर्नामेंट से बाहर होना रहा उतनी ही बड़ी सच्चाई ये भी है कि ये होना पहले से ही सुनिश्चित था.

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डिफेंडिंग चैम्पियन का बाहर होना तय

जाहिर है आपके दिलो-दिमाग में तरह-तरह के सवाल उठने लगे होंगे, जो कि लाजमी भी है. लेकिन हम आपको बता दें कि यहां जर्मनी की हार पहले से तय होने से मतलब मुकाबला फिक्स होने से नहीं है बल्कि फीफा वर्ल्ड कप के इतिहास के उन पन्नों से है जिसमें डिफेंडिंग चैम्पियन के लिए अपने ताज को बचा पाना आसान होना तो दूर उसके आखिरी 16 में पहुंचने पर भी पाबंदी है.

FIFA वर्ल्ड कप का इतिहास ही ऐसा है

साल 1998 में फ्रांस की टीम विश्व विजेता बनीं लेकिन 4 साल बाद 2002 के फीफा वर्ल्ड कप में वो ग्रुप स्टेज से बाहर हो गई. साल 2006 की विजेता टीम बनीं इटली. लेकिन 4 साल बाद 2010 के फीफा वर्ल्ड कप में क्या हुआ इटली की टीम ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई. 2010 में स्पेन ने फुटबॉल विश्व कप के खिताब पर कब्जा जमाया. लेकिन, 2014 में खेले अगले विश्वकप में उसे भी हारकर ग्रुप स्टेज से बाहर होना पड़ा. 2014 में जर्मनी ने चौथी बार फुटबॉल वर्ल्ड कप के खिताब पर कब्जा जमाया था. लेकिन, 2018 में रूस में खेले जा रहे वर्ल्ड कप में वही कहानी उसे साथ भी हुई जो पिछले 3 मौकों पर बाकी के चैम्पियन टीमों के साथ हुआ.

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जर्मनी का सबसे शर्मनाक प्रदर्शन

कहने का मतलब ये कि फीफा वर्ल्ड कप में जो भी टीम चैम्पियन बनी है उस पर अगले वर्ल्ड कप में ग्रुप स्टेज से बाहर होने की तलवार लटकती रही है. बड़ी बात ये है कि ये विश्वकप फुटबॉल के इतिहास में जर्मनी की टीम का सबसे शर्मनाक प्रदर्शन भी है. चार बार के चैंपियन का इससे खराब खेल पहले कभी देखने को नहीं मिला, 1958 में उसके पहले वर्ल्ड कप में भी नहीं जहां वो चौथे स्थान पर रही थी.