नई दिल्ली: फ्रांस और क्रोएशिया के बीच आज यहां के लुझनिकी स्टेडियम में 21वें फुटबॉल विश्वकप का फाइनल खेला जा रहा है. ग्रीजमैन के गोल की वजह से फ्रांस ने बढ़त बना ली है. फ्रांस-2, क्रोएशिया-1 . पेरिसिच के हैंड बॉल की वजह से फ्रांस को मिली पेनल्टी. वीएआर के जरिये हुआ फैसला. इससे पहले 28 में से 21 पेनल्टी गोल में तब्दील हुई हैं. फ्रांस तीसरी बार फाइनल में पहुंची है. वह 1998 में पहली बार अपने घर में खेले गए विश्व कप में फाइनल खेली थी और जीतने में सफल रही थी. इसके बाद 2006 में उसने फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन इटली से हार गई थी. फ्रांस के पास फाइनल खेलने का अनुभव है, लेकिन अगर क्रोएशिया की बात की जाए तो वह पहली बार फाइनल खेलेगी.Also Read - Himachal Pradesh vs Tamil Nadu, Final: दिनेश कार्तिक की शतकीय पारी की मदद से हिमांचल प्रदेश के सामने 315 रनों का लक्ष्य

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क्रोएशिया यहां तक पहुंचेगी यह किसी ने भी नहीं सोचा था, लेकिन उसने जिस तरह का खेल दिखाया है वो उसे फाइनल में जाने का हकदार बनाता है. हार न मानने की जिद क्रोएशिया की सबसे बड़ी ताकत है जो उसने इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में भी दिखाई थी. एक गोल से पीछे होने के बाद अतिरिक्त समय में मैच ले जाकर इंग्लैंड से जीत छीन ली थी. Also Read - Covid Cases, Deaths Surge in Russia: लगातार बढ़ रहे संक्रमण के मामले, मॉस्को में लगा 11 दिन का 'लॉकडाउन'

वह लगातार तीन मैच अतिरिक्त समय में ले जाकर जीतती आई है. इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह आखिरी पल तक हार नहीं मानती. फ्रांस के लिए यह सिरदर्द है, लेकिन क्या क्रोएशिया, फ्रांस की बेहद मजबूत चुनौती खासकर उसके डिफेंस को भेद पाने में कामयाब रहेगी, यह मैच के दिन ही पता चलेगा.

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लुका मोड्रिक की यह टीम फ्रांस को पस्त करने का माद्दा जरूर रखती है. क्रोएशिया एक संतुलित टीम है जिसकी ताकत उसकी मिडफील्ड है. लुका मोड्रिक को विश्व का सर्वश्रेष्ठ मिडफील्डर माना जाता है. कप्तान के तौर पर उनके ऊपर अपने देश को पहला विश्व कप दिलाने की जिम्मेदारी है. क्रोएशिया ऐसी टीम नहीं है जो सिर्फ एक खिलाड़ी के दम पर खेले. उसके पास एंटे रेबिक, इवान राकिटिक, सिमे वारसाल्ज्को, इवान पेरीकिस जैसे खिलाड़ी हैं.

क्रोएशिया की एक और ताकत है उनके गोलकीपर डेनियर सुबासिच. जिन्होंने पूरे विश्व कप में कई शानदार बचाव कर अपनी टीम को यहां तक पहुंचाने में शानदार भूमिका निभाई है. इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में भी उन्होंने आसान मौकों पर भी गोल नहीं करने दिए थे.

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क्रोएशिया के डिफेंस और गोलकीपर दोनों के लिए फ्रांस के आक्रामण को रोकना आसान नहीं होगा. एंटोनियो ग्रीजमैन, कीलियन एमबाप्पे, पॉल पोग्बा, एनगोलो कांते को रोकना टेढ़ी खीर है, हल्की सी चूक और ये गेंद को नेट में डाल देते हैं, लेकिन इससे भी ज्यादा मुश्किल क्रोएशिया के लिए फ्रांस के डिफेंस को तोड़ना है.

फ्रांस के डिफेंस में राफेल वरान, सैमुएल उम्तीती और गोलकीपर ह्यूगो लोरिस की तिगड़ी है जो अच्छे से अच्छे अटैक को अभी तक रोकने में सफल रही है. यह दीवार कभी न हार मानने वाली क्रोएशिया के सामने ढह जाएगी या नहीं इस बात का पता फाइनल में चलेगा.

फ्रांस ने जब पहली बार विश्व कप जीता था तब उसके कप्तान दिदिएर डेसचेम्पस थे जो इस समय टीम के कोच हैं. अगर यह रणनीतिकार फ्रांस को दूसरा विश्व कप दिलाने में सफल रहता है तो वह विश्व के ऐसे तीसरे शख्स बन जाएंगे जिसने खिलाड़ी और कोच के तौर पर विश्व कप जीता हो. उनसे पहले ब्राजील के मारियो जागालो और जर्मनी के फ्रांज बेककेनबायुएर ने कोच और खिलाड़ी से तौर पर विश्व कप जीते हैं. फाइनल मैच के रोमांचक होने की पूरी उम्मीद है.

टीम क्रोएशिया :

गोलकीपर – डेनिजेल सुबासिक, लोवरो कालिनिक और डोमिनिक लिवाकोविक

डिफेंडर – वेद्रन कोलुर्का, डोमागोज विदा, इवान स्ट्रिनीक, डेजान लोवरेन, सिमे वसाल्जको, जोसिप पीवारिक, टिन जेडवेज, डुजे सालेटा कार

मिडफील्डर – लुका मोड्रिक, मटिओ कोवाचिक, इवान रेकिटिक, मिलान बाडेल्ज, मासेर्लो ब्राजोविक और फिलिप ब्राडेरिक

फॉरवर्ड – मारियो मांजुकिक, इवान पेरीसिक, निकोला कालिनीक, एंद्रेज करामारिक, मार्को पीजासा और एंटे रेबिक

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टीम फ्रांस :

गोलकीपर – लोरिस, स्टीव मन्दंदा, अल्फोन्स एरोओला.

डिफेंडर – लुकास हर्नान्डेज, प्रेसनेल किम्पेम्बे, बेंजामिन मेन्डी, बेंजामिन पावर्ड, आदिल रामी, जिब्रिल सिदीबे, सैमुअल उम्तीती, राफेल वरान.

मिडफील्डर – एनगोलो कान्ते, ब्लेस मातुइदी, स्टीवन एंजोंजी, पॉल पोग्बा, कोरेंटिन टोलिसो.

फॉरवर्ड – ओउस्मान डेम्बेले, नाबिल फकीर, ओलिवियर जीरू, एंटोनी ग्रीजमैन, थॉमस लेमार, कीलियन एम्बाप्पे, फ्लोरियन थौविन.