नई दिल्ली. इमरान खान, पाकिस्तानी क्रिकेट का सबसे बड़ा नायक, जो अब वहां की राजनीतिक सत्ता का भी कप्तान बनने की ओर है. अगर ऐसा हो गया तो ये वाकई दिलचस्प होगा. ऐसा नहीं है कि दुनिया के किसी दूसरे क्रिकेटर ने अपने देश की राजनीति में कदम नहीं रखा. लेकिन, उनमें से अब तक किसी ने वो नहीं किया जो इमरान खान कर दिखाने जा रहे हैं. पाकिस्तान के क्रिकेट इतिहास में सबसे बड़े कप्तान का तमगा हासिल करने वाले इमरान खान अब वहां के वजीर-ए-आजम बनने की ओर हैं.

शख्सियत एक, पहलू अनेक

बहरहाल, इमरान अगर पाकिस्तान में चुनाव जीतकर सरकार बना लेते हैं तो कितने सफल होंगे, इसे समझने के लिए आपको उनके क्रिकेट वाली इमेज को समझना होगा. क्रिकेट के मैदान पर इमरान की छवि एक काबिल, जिद्दी, फाइटर, भरोसेमंद और दमदार लीडरशिप वाले कप्तान की है. इमरान खान की ऐसी ही शख्सियत का नतीजा था कि पाकिस्तान की टीम उनकी कप्तानी 1992 में क्रिकेट का वर्ल्ड कप जीतने में कामयाब रही.

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पाकिस्तान को बनाया विश्व विजेता

ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में खेले गए 1992 के वर्ल्ड कप में पाकिस्तान की चैम्पियन बनने की सबसे बड़ी वजह इमरान खान और मैदान पर उनके लिए फैसले रहे थे. पाकिस्तान इस वर्ल्ड कप के फाइनल में इंग्लैंड को 20 रन से हराकर विश्वविजेता बना था. 1992 वर्ल्ड कप के फाइनल और अपने करियर के आखिरी मैच में कप्तान इमरान खान ने 72 रन की पारी खेली थी.

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खुद पर था यकीन

खुद पर भरोसा और लीडरशिप क्वालिटी के साथ अपने मुल्क को आगे रखने की बात ही थी, जिससे इमरान ने न्यूट्रल अंपायर से अंपायरिंग कराई थी. कहा जाता था कि पाकिस्तान में 11 नहीं, 13 खिलाड़ियों के खिलाफ खेलना है. इमरान उस दौर में न्यूट्रल अंपायर लाए थे. वो भी भारत के खिलाफ, जिसके खिलाफ हारना कोई पाकिस्तानी नहीं चाहता. यह उनका खुद पर भरोसा तो दिखाता ही है. साथ ही, यह भी दिखाता है कि दुनिया में वो अपनी टीम की कैसी इमेज पेश करना चाहते थे.