इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) ने कोविड-19 महामारी के मद्देनजर अंतरिम स्वास्थ्य सुरक्षा उपाय के तहत गेंद पर लार के उपयोग को बैन कर दिया है. यह ऐसा कदम है जिसने बल्लेबाजों के हावी होने को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं. Also Read - WHO ने कोरोना के हवा में फैलने के मामले को लेकर जारी की गाइडलाइंस, साथ ही कही ये बात

भारतीय टीम के पूर्व कोच ग्रेग चैपल ने कहा है कि लार पर बैन के कारण मुकाबला ‘बहुत हद तक’ बल्लेबाजों के पक्ष में नहीं झुकेगा क्योंकि पसीने के इस्तेमाल से भी गेंद को चमकाने में मदद मिलती है. Also Read - यूजीसी को परीक्षाएं रद्द कर विद्यार्थियों को पहले के प्रदर्शन के आधार पर प्रोन्नत कर देना चाहिए: राहुल

फिलहाल के लिए गेंदबाज गेंद पर सिर्फ पसीने का इस्तेमाल कर सकते हैं. कयास है कि यह लार जितना प्रभावी नहीं होगा. ऑस्ट्रेलिया के इस पूर्व कप्तान ने ‘सिडनी मॉर्निंग हेराल्ड’ से कहा, ‘अगर वे अपने माथे से पसीना पोंछ रहे हैं, तो वहां सनस्क्रीन लगी होगी. अगर वे लार के उपयोग के लिए कुछ चबा रहे होते हैं, इससे क्या होने वाला है.’ Also Read - Coronavirus in Rajasthan Update: राजस्थान में नहीं थम रहा कोरोना का संक्रमण, 115 नए मामले, चार लोगों ने गंवाई अपनी जान

उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं पता कि इसमें बड़ी बात क्या है. पसीना निकलना लार के बराबर होगा. ईमानदारी से कहूं तो मैं इसमें अंतर नहीं देखता.’

‘वैक्स ऐप्लिकेटर की जरूरत नहीं पड़ेगी’

गेंद बनाने वाली कंपनी कूकाबुरा ने गेंदों को चमकाने के लिए वैक्स ऐप्लिकेटर विकसित किया है, लेकिन चैपल ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं होगी. बकौल चैपल, ‘गेंदबाज नई चीज खोजने में माहिर होते हैं. अगर उन्हें पसीना आता है तो गेंद की चमक बरकरार रहेगी. जब तक गेंद कठोर और खुरदुरी होगी तब तक गेंदबाज को मदद मिलती रहेगी.’