INDvsWI: वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप मुकाबले में वेस्टइंडीज के खिलाफ चल रहे टेस्ट सीरीज में हनुमा विहारी ने अपने प्रदर्शन से सबको प्रभावित कर दिया है. एंटिगा में खेले गए पहले टेस्ट मैच में अपनी शानदार पारी से हनुमा ने टीम में अपनी जगह बना ली थी, वहीं जमैका में चल रहे दूसरे टेस्ट मैच की पहली पारी में 111 रन और दूसरी पारी में नाबाद 53 रन बनाकर उन्होंने टीम में अपनी जगह भी सुरक्षित कर ली है. हनुमा ने अब तक महज 5 टेस्ट मैच खेले हैं और उनकी कौशलता को देखते हुए ऐसा लग रहा है कि टेस्ट टीम में नंबर 6 की दुविधा खत्म हो गई है.

इस सीरीज में उनके प्रदर्शन को देखकर ये भी कहा जा रहा है कि अब रोहित शर्मा के सामने भी हनुमा एक चुनौती बनकर उभर सकते हैं. दूसरे टेस्ट मैच की दूसरी पारी में अर्धशतक लगाकर हनुमा, सचिन तेंदुलकर के साथ ‘एलीट क्लब’ में शामिल हो गए हैं. वो सचिन के बाद भारत के दूसरे ऐसे बल्लेबाज बन गए हैं, जिन्होंने जमैका में खेले गए एक ही टेस्ट मैच में शतक और अर्धशतक बनाया है.

सचिन ने मैनचेस्टर में इंग्लैंड के खिलाफ ये उपलब्धि हासिल की थी. हनुमा एक ही टेस्ट मैच में शतक और अर्धशतक लगाने वाले पांचवें भारतीय बल्लेबाज भी बन गए हैं. दूसरे टेस्ट की पहली पारी में शतक जड़ने के बाद हनुमा ने कहा कि उन्होंने 12 साल की उम्र में अपने पिता के निधन के बाद क्रिकेट खेलने का निर्णय लिया था. हनुमा ने अपना पहला टेस्ट शतक पिता को समर्पित करते हुए कहा कि वो जहां भी होंगे उन्हें इस पल उन पर जरूर गर्व हो रहा होगा.

नंबर 6 पर बल्लेबाजी की चुनौतियों और टीम के लिए बड़े रन बनाने के बारे में हनुमा विहारी ने कहा, ‘जब आप नंबर 6 पर बल्लेबाजी करते हैं, तो आपका इरादा हमेशा सकारात्मक होना चाहिए. यह एक ऐसी स्थिति है जहां आप टीम के अंतिम बल्लेबाज के साथ बल्लेबाजी करते हैं और अगर वह आउट हो जाता है, तो आपका साथ देने के लिए कोई विशेषज्ञ बल्लेबाज नहीं होता. आपको विकेटकीपर या फिर गेंदबाजों के सहारे आगे बढ़ना होता है’.