भारत के पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण (Prakash Padukone) आज (10 जून, 2020) अपना 65वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं. सन 1955 में कर्नाटक में जन्मे इस दिग्गज ने इस खेल में उस समय भारत का नाम रोशन किया जब देश में इस खेल की क्रिकेट, हॉकी या फुटबॉल जैसी लोकप्रियता हासिल नहीं थी.  उन्होंने बतौर बैडमिंटन खिलाड़ी बेंगलुरु में अपना करियर शुरू किया था. उन दिनों प्रैक्टिस के लिए ना तो कोई स्टेडियम और ना ही कोई कोर्ट हुआ करते थे. प्रकाश का बैडमिंटन कोर्ट उनके घर के पास कैनरा यूनियन बैंक का मैरिज हॉल था. जहां उन्होंने बैडमिंटन का ककहरा सीखा. Also Read - दीपिका पादुकोण ने इस इमोशनल नोट के साथ किया पिता को बर्थडे विश, कहा- हीरो हैं आप   

लगातार 9 बार नेशनल खिताब जीते Also Read - 'फाइनल फोबिया' के ताने से परेशान पीवी सिंधू वर्ल्ड चैंपियन बनने को थीं बेकरार

प्रकाश लगातार 9 साल (1971-79) तक नेशनल चैंपियन रहे.  उन्होंने भारतीय बैडमिंटन के बारे में दुनिया के दृष्टिकोण पर गहरा असर डाला और यह दिखाने की कोशिश की कि चीन के खिलाड़ियों का किस तरह से सामना किया जा सकता है.  वह पहली बार 15 साल की उम्र में जूनियर और नेशनल चैंपियन बने.  साल 1971 में उन्होंने बालक वर्ग में और पुरुष एकल का खिताब अपने नाम किया. Also Read - पुलेला गोपीचंद के ऑनलाइन सेशन में अचानक स्‍क्रीन पर दिखने लगी पोर्न, मचा हड़कंप

ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीतने वाले पहले भारतीय बने

प्रकाश ने साल 1978 में कॉमवेल्थ खेलों में एकल वर्ग में गोल्ड मेडल अपने नाम किया.  यह उनके करियर का टर्निंग प्वाइंट रहा.  1980 में उन्होंने ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप जीतकर तहलका मचा दिया.  इस खिताब को जीतने वाले वह पहले भारतीय बने.  ऑल इंग्लैंड चैंपियन बनने के बाद प्रकाश वर्ल्ड रैंकिंग में नंबर वन पर काबिज हो गए.  साल 1980 से 1985 के बीच इस भारतीय खिलाड़ी ने लगभग 15 इंटरनेशनल खिताब अपने नाम किए.

पिता थे पहले कोच

प्रकाश को बैडमिंटन के क्षेत्र में लाने का श्रेय उनके पिता को जाता है.  मैसूर बैडमिंटन एसोसिएशन के सचिव रह चुके रमेश पादुकोण ने प्रकाश को बैडमिंटन में लाए.

भारतीय बैडमिंटन को दिलाई नई पहचान

23 मार्च, 1980 को 24 साल के प्रकाश ने ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप के पुरुष एकल वर्ग के फाइनल में इंडोनेशिया के लियेम स्वी किंग को 15-3, 15-10 से हराकर इंग्लैंड में भारतीय तिरंगे की शान को बढ़ाया था. . उस समय उन्होंने मौजूदा चैंपियन और खिताब के प्रबल दावेदार किंग की लगातार तीसरी बार इस खिताब को जीतने के सपने को चकनाचूर किया था.  इसके बाद भारत की दुनिया में बैडमिंटन के क्षेत्र में नई पहचान बनी.

लगातार दूसरी बार चैंपियन बनने का गंवाया मौका

1972 में अर्जुन अवॉर्ड और 1982 में पद्मश्री से सम्मानित प्रकाश ने 1981 में भी ऑल इंग्लैंड चैंपिनशिप के फाइनल में जगह बनाई लेकिन इस बार वह चूक गए.  उन्हें खिताबी मुकाबले में उसी इंडोनेशियाई खिलाड़ी का सामना करना पड़ा जिसे वह एक साल पहले हराकर खिताब जीत चुके थे.  लेकिन इस बार लियेम स्वी किंग ने तीन गेम तक खिंचे मुकाबले में11-15, 15-4, 15-6 पराजित कर दिया.

सिर्फ 2 भारतीय जीत पाए हैं ऑल ऑल इंग्लैंड चैंपियनशिप

प्रकाश के बाद वर्तमान में राष्ट्रीय टीम के कोच पुलेला गोपचंद ही ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीत पाए हैं.  गोपीचंद ने ये खिताब 2001 में जीता था.  अपने कोचिंग करियर में देश को कई चैंपियन खिलाड़ी दे चुके गोपीचंद ने फाइनल में चेन होंग को 15-12, 15-6 से हराया था.  इसके बाद से कोई भी भारतीय चैंपियन नहीं बन सका है.

साल 1991 में बैडमिंटन को कहा अलविदा

प्रकाश ने साल 1991 में बैडमिंटन से संन्यास ले लिया.  इस खेल को अलविदा कहने के बाद वह कुछ समय के लिए भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) के चेयरमैन भी रहे.  साल 1993 से 1996 तक वह भारतीय नेशनल बैडमिंटन टीम के कोच भी रहे.  साल 2017 में बाई ने उन्हें लाइफ टाइम अचीवेंट पुरस्कार से सम्मानित किया.