भारतीय टीम के लिए 100 से ज्यादा टेस्ट मैच खेल चुके सीनियर स्पिनर हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने अपने करियर में कई उपलब्धियां हासिल की लेकिन 2008 का मंकीगेट विवाद आज भी उनके करियर पर काले धब्बे की तरह है। Also Read - IPL 2020 का दूसरे देश में होना लगभग तय, BCCI अध्यक्ष सौरव गांगुली के इस बयान से हुआ साफ

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान खिलाड़ियों के बीच काफी नोकझोंक देखने को मिली जो आगे चलकर क्रिकेट जगत का सबसे बड़ा विवाद बना। जिसमें भारतीय ऑफ स्पिनर हरभजन सिंह और ऑस्ट्रेलिया के एंड्रयू साइमंड्स (Andrew Symonds) शामिल थे। Also Read - ‘सौरव गांगुली ने टीम इंडिया को जीत की मानसिकता दी, धोनी के बाद विराट ने इसे नई ऊंचाइयों पर पहुंचा’

खुद को अंपायर समझ रहे थे रिकी पॉन्टिंग

उस मैच को याद करते हुए हरभजन ने कहा कि तत्कालीन ऑस्ट्रेलियाई कप्तान रिकी पॉन्टिंग खुद अंपायर की तरह व्यवहार कर रहे थे। हरभजन ने भारतीय टेस्ट टीम के पूर्व सलामी बल्लेबाज आकाश चोपड़ा के यूट्यूब शो आकाशवाणी पर कहा, ”जब मैं 2008 सिडनी टेस्ट मैच की बात करता हूं तो मुझे लगता है कि पॉन्टिंग खुद ही अंपायर बन गए थे। वो कैच पकड़ने का दावा कर रहे थे और खुद ही फैसले सुना दे रहे थे।” Also Read - सौरव गांगुली ने बताया क्यों पहली गेंद का सामना करना पसंद नहीं करते थे तेंदुलकर

हरभजन ने कहा, ”ऑस्ट्रेलियाई कहते हैं कि जो मैदान पर हुआ उसे मैदान पर ही छोड़ देना चाहिए, लेकिन जो विवाद मेरे और साइमंड्स के बीच हुआ, वो मैदान के बाहर चला गया। मैं और साइमंड्स एक दूसरे के काफी पास थे और हमारे पास सचिन तेंदुलकर थे। जब सुनवाई शुरू हुई तो मैथ्यू हेडन, एडम गिलक्रिस्ट, माइकल क्लार्क और रिकी पॉन्टिंग, चारों ने कहा कि हमने भज्जी को साइमंड्स से कुछ कहते सुना है।”

उन्होंने कहा, ”मैं सोच रहा था कि तुम लोग तो पास में ही नहीं थे, जहां तक कि सचिन भी नहीं जानते थे कि क्या हुआ है। सिर्फ मैं और साइमंड्स जानते थे कि क्या हुआ है। मैं विवादों में फंस गया। सुनवाई हुई और मैं काफी डरा हुआ था कि मेरे साथ क्या हो रहा है। ऑस्ट्रेलियाई मीडिया ने मुझे माइकल जैक्सन बना दिया था। मेरा पीछा लगातार कैमरे कर रहे थे।”