रवि शास्त्री को 2019 के वर्ल्ड कप तक के लिए टीम इंडिया का नया कोच नियुक्त कर दिया गया है. शास्त्री की नियुक्ति जून में चैंपियंस ट्रॉफी के बाद कोच पद से कुंबले के इस्तीफे के बाद की गई है. इससे पहले वह 2014 से 2016 तक टीम इंडिया के डायरेक्टर रह चुके हैं. Also Read - IPL 2021: MS Dhoni और Rishabh Pant की टक्कर, कोच रवि शास्त्री ने कही यह बात

टीम इंडिया में 90 के दशक के पहले तक कोच की जगह टीम मैनेजर की नियुक्ति की जाती थी. भारतीय टीम में पूर्णकालिक कोच चुनने की प्रक्रिया 1992 में अजित वाडेकर के कोच बनने के साथ हुई. सिर्फ 2007 के टी20 वर्ल्ड कप के लिए लालचंद राजपूत की नियुक्ति मैनेजर के तौर पर हुई थी. आइए जानें अजित वाडेकर से लेकर रवि शास्त्री तक भारतीय क्रिकेट टीम के अब तक बने कोचों पर एक नजर. Also Read - IND-ENG Series के दौरान रवि शास्‍त्री ने Virat-Rohit में कराई सुलाह, मैदान पर भी आई नजर: सूत्र

1. अजित वाडेकर, 1992-96: वाडेकर भारतीय क्रिकेट इतिहास के पहले पूर्वकालिक कोच बने थे और इसके साथ ही टीम मैनेजर बनाने की प्रक्रिया खत्म हो गई. वाडेकर के कार्यकाल में कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन के नेतृत्व में भारतीय टीम घरेलू मैदानों पर एक ताकतवर टीम के रूप में उभरी. 1992-96 के बीच घर पर खेले गए 14 टेस्ट मैचों में भारतीय टीम अजेय रही, इसके अलावा वनडे में भी उसे अच्छी सफलताएं मिलीं, लेकिन वाडेकर के नेतृत्व में टीम विदेशी धरती पर सफलताएं हासिल नहीं कर सकी. Also Read - India vs England: भारतीय टीम की जीत से गदगद हुए कोच Ravi Shastri, ट्विटर पर लिखी दिल छू लेने वाली बात

अजित वाडेकर को भारतीय क्रिकेट इतिहास का पहला पूर्णकालिक कोच होने का गौरव प्राप्त है (Getty)

अजित वाडेकर को भारतीय क्रिकेट इतिहास का पहला पूर्णकालिक कोच होने का गौरव प्राप्त है (Getty)

 

2. संदीप पाटिल, 1996: वाडेकर के बाद थोड़े समय के लिए पूर्व धाकड़ बल्लेबाज रहे संदीप पाटिल को इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टीम का कोच बनाया गया. ये दौरा भारत के लिए निराशाजनक साबित हुआ और पाटिल को कोच पद से बर्खास्त कर दिया गया. बाद में पाटिल कीनिया और ओमान जैसी टीमों के भी कोच रहे.  (टीम इंडिया के नए कोच रवि शास्त्री पर ‘कंट्रोल’ के लिए ये है सौरव गांगुली का ‘मास्टरस्ट्रोक’?)

3. मदन लाल, 1996-97:  1983 वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के सदस्य रहे मदन लाला को पाटिल के बाद लगभग एक साल के लिए भारतीय टीम का कोच बनाया गया. उनके कार्यकाल में भारत ने घरेलू सीरीज में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका जैसी टीमों को मात दी लेकिन वेस्टइंडीज दौरे पर ब्रिजटाउन में खेले गए टेस्ट में 120 रन के लक्ष्य के जवाब में भारतीय टीम 81 रन पर सिमट गई और मदन लाल का कार्यकाल खत्म हो गया.

4. अंशुमन गायकवाड, 1997-99, 2000: मदनलाल के बाद भारतीय टीम के कोच बने अंशुमन गायकवाड. गायकवाड के कार्यकाल में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अजहरुद्दीन की कप्तानी में 2-1 से टेस्ट सीरीज जीती, इंडिपेंडेस कप जीता और पाकिस्तान के खिलाफ एक पारी में कुंबले का 10 विकेट लेना भी उनके करियर की प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है. कपिल देव के इस्तीफे के बाद वह 2000 में थोड़े दिन के लिए फिर से कोच बने और टीम इंडिया 2000 आईसीसी नॉक आउट के फाइनल तक पहुंची, जहां उसे न्यूजीलैंड ने हराया. (टीम इंडिया के नए हेड कोच बने रवि शास्त्री, दो साल के लिए जहीर खान को बॉलिंग कोच की जिम्मेदारी)

5. कपिल देव, 1999-2000: पूर्व कप्तान और महान तेज गेंदबाज कपिल देव का कोचिंग कार्यकाल बेहद निराशाजनक रहा था. कपिल के कार्यकाल में सचिन की कप्तानी में भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज 3-0 से हार गई जबकि दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घर में ही टेस्ट सीरीज गंवा दी. मैच फिक्सिंग के आरोपों ने जब भारतीय क्रिकेट को झकझोरा और मनोज प्रभाकर ने खुद कपिल पर ये आरोप लगाए तो बेहद ही निराशानजक ढंग से कपिल को अपना पद छोड़ना पड़ा.

महान क्रिकेट रहे कपिल देव भारत के सबसे असफल कोच साबित हुए  (Getty)

महान क्रिकेटर रहे कपिल देव भारत के सबसे असफल कोचों में से एक साबित हुए (Getty)

 

6. जॉन राइट, 2000-05: न्यूजीलैंड के जॉन राइट भारतीय क्रिकेट इतिहास के पहले विदेशी कोच थे. कप्तान सौरव गांगुली के साथ मिलकर उन्होंने टीम इंडिया को मैच फिक्सिंग के दंश से उबारकर सफलता की एक नई इबारत लिख डाली. उनके कार्यकाल में टीम इंडिया 2003 के वर्ल्ड कप फाइनल में पहुंची, ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में टेस्ट मैच जीते और 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ उसके घर में वनडे और टेस्ट सीरीज जीती.

7. ग्रेग चैपल, 2005-07: पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर ग्रेग चैपल भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे विवादित कोचों में से एक रहे. सौरव गांगुली के साथ उनका विवाद, गांगुली का नेशनल टीम से निकाला जाना और फिर 2007 के वर्ल्ड कप में पहले ही दौर से टीम इंडिया का बाहर होना चैल के करियर के सबसे खराब क्षणों में से रहे. 2007 के वर्ल्ड कप के बाद चैपल ने अपने करार आगे नहीं बढ़ाया.

ग्रेग चैपल भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे विवादित कोच रहे (Getty)

ग्रेग चैपल भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे विवादित कोच रहे (Getty)

 

8. गैरी कस्टर्न, 2007-11: गैरी कर्स्टन ने एमएस धोनी के साथ मिलकर भारतीय क्रिकेट को सफलता की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया. कस्टर्न के कार्यकाल में भारत ने दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका दौरे पर टेस्ट सीरीज ड्रॉ की जबकि एशिया कप के फाइनल तक पहुंचा. उनके कार्यकाल का सबसे यादगार दौर टीम इंडिया का 2011 का वर्ल्ड कप जीतना रहा. (रवि शास्त्री के ऑलराउंडर से टीम इंडिया का कोच बनने तक की कहानी)

9. डंकन फ्लेचर, 2011-15: फ्लेचर का करियर भी विवादों से अछूता नहीं रहा. उनके कार्यकाल में धोनी की कप्तानी में भारत को 2011 से 12 के दौरान महज छह महीनों में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विदेशों में भारत को लगातार 8 टेस्ट मैच गंवाने पड़े. 2014 में इंग्लैंड की धरती पर एक और टेस्ट सीरीज गंवाने के बाद बीसीसीआई ने रवि शास्त्री को टीम इंडिया का डायरेक्टर नियुक्त किया. 2015 वर्ल्ड कप सेमीफाइनल में भारत की हार के बाद फ्लेचर ने भारतीय क्रिकेट से नाता तोड़ लिया.

10. रवि शास्त्री, 2014-16: फ्लेचर के कोच रहते हुए शास्त्री की टीम डायरेक्टर पद पर नियुक्ति से भारतीय क्रिकेट में मैनेजर वाले कार्यकाल की वापसी हुई. शास्त्री के डायरेक्टर बनने के बाद टीम इंडिया ने श्रीलंका में टेस्ट सीरीज जीती और घर में दक्षिण अफ्रीका को 3-0 से सीरीज जीती, साथ ही एशिया कप में जीत और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ उसके घर में मिली टी20 सीरीज जीत खास रही. 2016 के टी20 वर्ल्ड कप में टीम इंडिया की हार के साथ ही शास्त्री का कार्यकाल खत्म हो गया.

11. अनिल कुंबले, 2016: शास्त्री के डायरेक्टर पद से हटने के बाद पूर्व स्पिनर अनिल कुंबले की कोच पद पर नियुक्ति हुई. कुंबले के कार्यकाल में कोहली की कप्तानी में भारतीय टीम ने वेस्टइंडीज के खिलाफ उसके घर में टेस्ट सीरीज जीतने के अलावा अपने घर में 13 टेस्ट मैचों में से सिर्फ एक गंवाया और इस दौरान न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट सीरीज जीती. चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में हार के बाद कप्तान कोहली से लंबे समय से जारी मतभेद की खबरों के बीच कुंबले ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.