कोझीकोड: मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर मंगलवार को 45 साल के हो गए और देश-दुनिया में फैले उनके करोड़ों प्रशंसक तरह-तरह से उन्हें बधाई देते हैं. लाखों की लोगों की प्रेरणा बने सचिन लोगों के दिलों में रहते हैं. कुछ ऐसे प्रशंसक हैं, जो तेंदुलकर के नाम से कुछ न कुछ अच्छा और बेहतर काम करते हैं. उनके ऐसे ही एक फैन प्रोफेसर ने तो कॉलेज में सचिन के नाम पर लाइब्रेरी ही खोली है और इसमें उनके बारे में कई किताबें हैं और ये किताबें 11 भाषाओं में हैं.

केरल के एक प्रोफेसर वसिष्ठ मनिकोठ ने सचिन के नाम पर कोझीकोड में मालाबार क्रिश्चियन कॉलेज में लाइब्रेरी स्थापित की है. इस लाइब्रेरी में अकेले सचिन के नाम से 60 किताबें उपलब्ध हैं. सचिन पर लिखी गई ये किताबें 11 भाषाओं में प्रकाशित हैं. इनमें मलायालम, तेलगू, कन्नड़, मराठी, गुजराती, हिंदी आदि में हैं. हिस्ट्री के प्रोफसर स्टूडेंट्स को इस महान क्रिकेटर के बारे में किताबें उपलब्ध करवा रहे हैं.

सचिन पर देवेंद्र प्रभुदेसाई की किताब विनिंग लाइक सचिन : थिंक एंड सक्सीड लाइक तेंदुलकर के मुताबिक, वह 1984 की गर्मियों का समय था, जब प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर के एक फैसले ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का जीवन बदल दिया. यह फैसला सचिन का स्कूल बदलने के बारे में था, जिसने उनकी तकदीर बदल कर रख दी. सचिन महज 11 साल के थे, जब उनके बड़े भाई अजित उन्हें कोच रमाकांत आचरेकर के पास ले गए. आचरेकर की राय थी कि सचिन खेल में काफी आगे जा सकते हैं और इसलिए बेहतर होगा कि उन्हें प्रतिस्पर्धी क्रिकेट तक पहुंच मुहैया कराई जाए.

पुस्तक के मुताबिक, समस्या यह थी कि मुंबई के जिस अंग्रेजी माध्यम के स्कूल आईईएस में सचिन पढ़ते थे, उसमें क्रिकेट टीम नहीं थी। आचरेकर ने सलाह दी कि सचिन का नाम शारदाश्रम विद्यामंदिर स्कूल में लिखा दिया जाए.आचरेकर इस स्कूल की अंग्रेजी और मराठी माध्यम की क्रिकेट टीम को कोचिंग देते थे.

भारत में सचिन तेंदुलकर को भगवान की तरह मानने वाले देश के करोड़ों क्रिकेट प्रेमियों के लिए 24 अप्रैल का दिन किसी उत्सव से कम नहीं है, क्योंकि सचिन तेंदुलकर का जन्म इसी दिन हुआ था. (इनपुट- एजेंसी)