किंगस्टन: हनुमा विहारी(Hanuma Vihari) ने अब तक सभी छह टेस्ट भारत के बाहर खेले हैं और अब अपनी धरती पर अगले महीने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ श्रृंखला का उन्हें बेकरारी से इंतजार है. वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की श्रृंखला में 289 रन बनाने वाले विहारी ने संतोष जताया कि पेचीदा पिचों पर संयम रखने से उन्हें फायदा मिला. उन्होंने कहा,‘‘ मैने भारत में एक भी टेस्ट नहीं खेला है और मुझे इसका इंतजार है. घरेलू दर्शकों के सामने खेलना अद्भुत होगा.’’ आंध्र प्रदेश के इस बल्लेबाज को दूसरे टेस्ट में शतक और अर्धशतक जमाने के कारण मैन आफ द मैच चुना गया.

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उन्होंने मैच के बाद कहा ,‘‘ पहला टेस्ट शतक जमाकर अच्छा लग रहा है. पिछले मैच में मैं चूक गया था लिहाजा इस पर ध्यान बड़े स्कोर पर था. हमने पांच विकेट 200 रन पर गंवा दिये थे और ऋषभ के साथ बल्लेबाजी करते समय मेरा लक्ष्य बड़ा स्कोर बनाना था.’’ विहारी ने कहा,‘‘ इस विकेट पर धैर्य की जरूरत होती है क्योंकि तेज गेंदबाजों को मदद मिल रही थी.

मैंने सोच समझकर स्पिनरों के खिलाफ जोखिम लिया और यह रणनीति सही रही.’’ विहारी ने साथ ही दूसरे टेस्ट में अपनी सफलता का श्रेय मुख्य कोच रवि शास्त्री को देते हुए कहा कि उनकी बल्लेबाजी करते हुए घुटने मोड़कर खेलने की सलाह से उन्हें पहला शतक बनाने में मदद मिली.

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विहारी से जब से पूछा गया कि उनकी पहली पारी के बाद शास्त्री ने उन्हें क्या कहा तो दायें हाथ के इस बल्लेबाज ने बताया, ‘‘वह (शास्त्री) घुटने को थोड़ा मोड़कर खेलने की बात कर रहे थे, घुटने मोड़कर खेलने का मतलब था कि मैं अपने पैरों को आगे और पीछे दोनों ओर मूव कर सकता हूं.’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसका काफी फायदा हुआ और उन्हें काफी श्रेय जाता है.’’ पच्चीस साल के विहारी दो टेस्ट की श्रृंखला में 289 रन के साथ भारत के सबसे सफल बल्लेबाज रहे. आंध्र के इस बल्लेबाज ने कहा, ‘‘मुझे दबाव में बल्लेबाजी करना पसंद है, बल्लेबाज के रूप में आपको यह चुनौती स्वीकार करनी होती है और ऐसी स्थिति में मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करता हूं.’’