हर क्रिकेटर का सचिन तेंदुलकर (Sachij Tendulkar) और विराट कोहली (Virat Kohli) जैसी शोहरत हासिल कर पाना मुमकिन नहीं है लेकिन अपने देश के लिए क्रिकेट खेलने का मौका मिलना अपने आप में ही बड़ी उपलब्धि है, जिसकी अहमियत पूर्व क्रिकेटर दिलीप वेंगसरकर (Dilip Vengsarkar) जानते हैं। इसलिए सुनील गावस्कर और गुंडप्पा विश्वनाथ जैसी शोहरत ना मिलने पर भी वो अपने करियर से काफी खुश हैं। Also Read - इरफान पठान की मदद से आईपीएल तक पहुंचा जम्मू-कश्मीर का क्रिकेटर टूर्नामेंट स्थगित होने से नाखुश

64 साल के हो चुके ‘कर्नल’ ने प्रेस ट्रस्ट को दिए इंटरव्यू में कहा, ‘‘जब मैं पीछे देखता हूं तो काफी अच्छा और संतोषजनक सफर रहा। भारत के लिए 116 टेस्ट खेलना सबसे बड़ा संतोष है। इसके अलावा 129 वनडे, विश्व कप जीतना और विश्व चैम्पियनशिप जीतना। इसके साथ भारत की कप्तानी। ये शानदार सफर रहा।’’ Also Read - बीसीसीआई को भरोसा, भारत से टी20 विश्व कप की मेजबानी छीनकर 'आत्महत्या' नहीं करेगी ICC

लॉडर्स के ऐतिहासिक मैदान पर तीन शतक लगाने वाले एकमात्रा विदेशी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और सत 70-80 के दशक के खतरनाक कैरेबियाई गेंदबाजी अटैक के सामने छह शतक जमाने वाले वेंगसरकर को क्या महसूस होता है कि उन्हें वो श्रेय नहीं मिला जिसके वो हकदार थे , ये पूछने पर उन्होंने कहा, ‘‘ये भाग्य की बात है। आपको कड़ी मेहनत करके ईमानदारी से खेलकर टीम के लिए मैच जीतने होते हैं। ये हर क्रिकेटर का लक्ष्य होना चाहिए। इस तरह से जो भी उपलब्धियां या पहचान मिलती है, आपको श्रेय मिलता है या नहीं, ये सब भाग्य की बात है।’’ Also Read - भारतीय क्रिकेट के पोस्टर ब्वॉय रहे इस पूर्व ऑलराउंडर ने युवराज सिंह से पहले जड़ दिए थे एक ओवर में 6 छक्के