इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) पैनल के भारतीय अंपायर अनिल चौधरी को भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच वनडे मैचों में अंपायरिंग करनी थी लेकिन सीरीज बीच में ही रोक दिए जाने के कारण वह 16 मार्च को अपने गांव डांगरोल आ गए थे। लॉकडाउन के दौरान वह उत्तर प्रदेश के शामली जिला स्थित अपने गांव में फंस गए जहां मोबाइल नेटवर्क न होने से वह किसी से भी संपर्क नहीं कर पा रहे थे। यहां तक कि वह आईसीसी की कार्यशालाओं में भी भाग नहीं ले पाए थे। इसके बाद चौधरी ने गांव में नेटवर्क सुधारने का बीड़ा उठाया और अब जाकर उन्हें इसमें सफलता मिली है। Also Read - IPL Governing Council Meeting Update: आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की बैठक आज, ये 10 चीजें होंगी एजेंडे में

अब चौधरी को ‘पेड़ पर चढ़कर बात नहीं करनी पड़ती है।’ चौधरी ने ‘भाषा’ से कहा, ‘मैंने आईसीसी की कुछ कार्यशालाओं में भाग लिया लेकिन जब मैं गांव में था तब ऐसा नहीं कर पाया था। मुझे इसके लिए दिल्ली जाना पड़ता था। ऐसे में मेरा एक पांव दिल्ली में तो दूसरा गांव में होता था।’ Also Read - On this day In 1956: 64 साल बाद भी कायम है जिम लेकर का वर्ल्ड रिकॉर्ड, जानिए पूरी डिटेल

20 वनडे और 28 टी20 में कर चुके हैं अंपायरिंग  Also Read - England vs Ireland 2020, 1st ODI : डेविड विले की करियर बेस्ट गेंदबाजी के दम पर कोरोनाकाल के पहले वनडे में इंग्लैंड ने मारी बाजी

अब तक 20 वनडे और 28 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में अंपायरिंग कर चुके चौधरी की परेशानी के बाद एक मोबाइल प्रदाता कंपनी ने उनसे संपर्क किया और पिछले कई वर्षों से नेटवर्क के लिए सरकारी कार्यालयों की खाक छानने वाले ग्रामीणों ने अब जाकर राहत की सांस ली।

‘अब मुझे दिल्ली भागने की जरूरत नहीं’

चौधरी ने कहा, ‘मैं अब भी गांव में हूं लेकिन अब मुझे अपने पेशे से जुड़े किसी काम के लिए दिल्ली भागने की जरूरत नहीं है। मैं गांव से ही तमाम कार्यशालाओं में भाग ले सकता हूं।’

उन्होंने कहा, ‘वर्तमान परिदृश्य में यह ग्रामीणों और विशेषकर विद्यार्थियों को नेटवर्क की सख्त जरूरत थी और जब कई गांववाले मेरा आभार व्यक्त करने आये तो तब मुझे लगा कि गांववासियों के लिये वास्तव में यह बड़ी उपलब्धि है। अब उन्हें फोन करने के लिये पेड़ नहीं चढ़ना पड़ता है।’

‘अंपायर साहब की मेहनत रंग लाई’

जालंधर में एक निजी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत डॉ. सुभाष ने कहा कि अगर चौधरी इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाते तो यह समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती। उन्होंने कहा, ‘अंपायर साहब की मेहनत रंग लाई। अब मैं गांव से ही ऑनलाइन कक्षाएं ले पा रहा हूं।’