साउथम्पटन: माना ही जाता है कि कई मुश्किल मौकों पर विराट कोहली की बजाय मैदान पर वही होता है जो महेंद्र सिंह धोनी कहते या चाहते हैं. अफगानिस्तान के खिलाफ भी कुछ ऐसा ही हुआ और इसका खुलासा खुद मोहम्मद शमी ने किया, जिन्होंने आखिरी ओवर में तीन विकेट लेकर धमाकेदार गेंदबाजी करते हुए टीम इंडिया को जीत दिला दी. और इस खुलासे से यह साबित हुआ कि टीम के कप्तान भले ही विराट कोहली हैं, लेकिन कई अहम मौकों पर धोनी कप्तान की भूमिका में आ जाते हैं.

मैच जीतने के बाद मोहम्मद शमी ने कहा कि अफगानिस्तान के खिलाफ भारत के रोमांचक विश्व कप मुकाबले के दौरान महेंद्र सिंह धोनी ने ही उन्हें सलाह दी थी. शमी ने कहा कि माही भाई (धोनी का उपनाम) ने सलाह दी थी कि वह हैट्रिक के लिए यार्कर डालें और उन्होंने भी ऐसा ही किया। वह इस बारे में पहले से ही सोच रहे थे. और धोनी की सलाह के बाद उन्हें ऐसी सफलता मिली कि इतिहास रचने के साथ ही टीम इंडिया ने बेहद रोचक और अहम् मैच भी बचा लिया.

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धोनी की सलाह पर हैट्रिक जमाने वाले शमी चेतन शर्मा के बाद विश्वकप में हैट्रिक लेने वाले दूसरे भारतीय गेंदबाज बन गये हैं. 1987 विश्व कप में चेतन शर्मा ने न्यूजीलैंड के खिलाफ यह हैट्रिक हासिल की थी. 50 ओवरों के विश्व कप के इतिहास में यह 10वीं हैट्रिक है.

शमी ने 40 ओवर में चार विकेट झटकने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में कहा, ‘‘रणनीति सरल थी और वो यार्कर डालने की थी. यहां तक कि माही भाई ने भी इसी का सुझाव दिया. उन्होंने कहा था, ‘अब कुछ भी मत बदलो क्योंकि तुम्हारे पास हैट्रिक हासिल करने शानदार मौका है.’’ धोनी ने मुझसे कहा कि ‘‘हैट्रिक एक शानदार उपलब्धि है और तुम्हें इसके लिए कोशिश करनी चाहिए. इसलिए मैंने वही किया जो मुझे उन्होंने बताया.’’ भुवनेश्वर कुमार की हैमस्ट्रिंग जकड़न के कारण शमी को इस मैच में खेलने का मौका मिला और इस तेज गेंदबाज ने स्वीकार किया कि वह भाग्यशाली रहे कि उन्हें अंतिम एकादश में शामिल किया गया.

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मोहम्मद शमी ने कहा कि ‘‘अंतिम एकादश इलेवन में शामिल होने का मौका मिलना थोड़ा मुश्किल होता है. मैं जानता था जब भी मुझे मौका मिलेगा तो इसका पूरा फायदा उठाऊंगा. जहां तक हैट्रिक की बात है तो विश्वकप में कम से कम यह दुर्लभ ही है. मैं इससे खुश हूं.’’ शमी ने कहा कि अंतिम ओवर में सोचने का समय नहीं था और लक्ष्य यही था कि रणनीति के हिसाब से खेला जाए. उन्होंने कहा, ‘‘सोचने का समय नहीं था. आपको अपनी काबिलियत के हिसाब से खेलने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता. अगर आप वैरिएशन आजमाते भी हैं, तो रन बनने की संभावना ज्यादा हो जाती है. मैं बल्लेबाज का दिमाग पढ़ने की कोशिश करने के बजाय अपनी रणनीति का कार्यान्वयन करना चाहता था.’’