पुलवामा में CRPF के काफिले पर हुए आतंकी हमले के बाद इस साल होने वाले क्रिकेट वर्ल्ड कप में भारत के पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलने को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही है. आतंकी हमले के बाद देश का एक बड़ा जनमानस पाकिस्तान के साथ हर तरह का संपर्क तोड़ने का पक्षधर है. कुछ पूर्व क्रिकेटरों ने भी वर्ल्ड कप में पाकिस्तान का बहिष्कार करने की बात कही है. जो भी हो… इस बारे में फैसला बीसीसीआई और केंद्र सरकार को करना है, लेकिन इस चर्चा ने ठीक 20 साल की याद को ताजा कर दिया है. कांग्रेस के नेता शशि थरूर के बयान ने इसे और हवा दे दी है. Also Read - मन की बात: PM ने कहा, पाकिस्‍तान ने बड़े-बड़े मंसूबे पालकर भारत की भूमि हथियाने का दुस्‍साहस किया था

वर्ष 1999 में भारत और पाकिस्तान की सेनाएं करगिल में एक दूसरे पर गोलियों की बौछार कर रही थी. ठीक उसी समय इंग्लैंड में क्रिकेट वर्ल्ड कप चल रहा था. भारत और पाकिस्तानी घुसपैठियों के बीच करगिल में मई में जंग शुरू हो चुका था. वो जंग 26 जून तक चला था. ठीक उसी वक्त 14 मई को इंग्लैंड में क्रिकेट वर्ल्ड कप की शुरुआत हुई.

एक तरफ भारतीय सेना के जबांज करगिल की चोटियों पर धावा बोल रहे थे तो दूसरी तरफ मोहम्मद अजहरूद्दीन के नेतृत्व में टीम इंडिया पाकिस्तानी टीम को धूल चटाने के लिए मैदान में उतरने वाली थी. वर्ल्ड कप के दौरान 8 जून 1999 को भारत और पाकिस्तान की टीमों में मुकाबला हुआ. इस करो या मरो जैसी स्थिति वाले मैच में सचिन तेंदुलकर ने अच्छी शुरुआत की थी. उन्होंने वसीम अकरम, शोएब अख्तर और सकलैन मुश्ताक की गेंदों का सामना करते हुए 45 रन बनाए थे. भारतीय टीम ने 50 ओवर में 6 विकेट पर 227 रन बनाए थे.

इसके बाद भारतीय टीम बल्लेबाजी करने मैदान में उतरी. जवगल श्रीनाथ, वेंकटेश प्रसाद और अनिल कुंबले के नेतृत्व में 46 ओवर में 180 रनों पर पूरी पाकिस्तानी टीम को पवेलियन भेज दिया. हालांकि पाकिस्तान को हराने के बाद टीम इंडिया वर्ल्ड कप में और आगे नहीं बढ़ पाई.