नई दिल्ली. भारत और ऑस्ट्रेलिया की टीम जब सिडनी क्रिकेट ग्राउंड पर उतरी तो उनके हाथों में काली पट्टी बंधी थी. सिडनी टेस्ट में काली पट्टी बांधकर खेलने उतरने का दोनों टीमों का अपना-अपना मकसद है. टीम इंडिया ने काली पट्टी बांधकर सचिन तेंदुलकर के बचपन के कोच रमाकांत आचरेकर के निधन को लेकर अपने दुख को जताया है.

द्रोणाचार्य अवार्डी रमाकांत आचरेकर ने भारतीय क्रिकेट को सचिन, कांबली, अगरकर और प्रवीण आमरे जैसे कई बड़े खिलाड़ी दिए. लेकिन, उनकी ख्याति सबसे ज्यादा सचिन तेंदुलकर के लिए हुई, जिसने वर्ल्ड क्रिकेट के सीने पर दो दशकों तक राज किया. जो भारत के लाखों युवा क्रिकेटरों का रोल मॉडल बना. धोनी और विराट जैसे आज के बड़े क्रिकेटर भी सचिन को ही देखकर बड़े हुए. और, ये सब रमाकांत आचरेकर के सचिन को सिखाए क्रिकेट के ककहरे के बगैर संभव नहीं था. शायद इसीलिए सचिन भी उन्हें कभी नहीं भूल पाएंगे.

टीम इंडिया की ही तरह ऑस्ट्रेलियाई टीम भी सिडनी टेस्ट में काली पट्टी बांधकर उतरी. लेकिन उनका मकसद भारतीय क्रिकेटरों से जुदा था. उन्होंने अपने बाजुओं पर काली पट्टी पूर्व ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेटर बिल वॉटसन के निधन पर शोक जताने के लिए बांध रखा था.

न्यू साउथ वेल्स के बल्लेबाज बिल वॉटसन का हाल ही में 87 साल की उम्र में निधन हो गया था.