पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान इयान चैपल (Ian Chappell) का मानना है कि कोविड महामारी की वजह से मौजूदा क्रिकेटरों की जिंदगी काफी मुश्किल होती जा रही है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच खेली गई टेस्ट सीरीज के दौरान भारतीय गेंदबाज मुश्किल हालातों और इंजरी के बावजूद खुद को तरोताजा रखने में कामयाब रहे थे।Also Read - बीसीसीआई ने उठाया बड़ा कदम, VVS Laxman को सौंपी कोच पद की जिम्मेदारी

ईएसपीएन क्रिकइंफो के अपने कॉलम में उन्होंने लिखा, “आज कल के क्रिकेटर पुराने क्रिकेटरों के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं। हालांकि जैसा कि जिंदगी के हर पहलू में होता, इसके भी कुछ नकारात्मक नतीजे हैं। जिसका मतलब यहां अलग अलग फॉर्मेट के हिसाब से खुद को ढालने और व्यस्त शेड्यूल के निपटने से है।” Also Read - हफ्ते में सिर्फ 3 दिन जाना होगा ऑफिस, 8 फीसदी बढ़ेगी सैलरी; जानिए - कौन सी कंपनी दे रही है यह सुविधा

उन्होंने कहा, “पिछली भारत-ऑस्ट्रेलिया सीरीज के दौरान इसका उदाहरण देखने को मिला, जब घरेलू टीम ने चार टेस्ट मैचो में एक ही पेस अटैक का इस्तेमाल किया। जहां एक तरफ टूर्नामेंट के आखिरी स्टेज में ऑस्ट्रेलियाई तेज गेंदबाज थक गए, वहीं भारतीय गेंदबाजों को इंजरी की वजह से ब्रेक मिले जिस वजह से उन्हें लगातार बदलाव करने पड़े। भारत उन कुछ टीमों से हैं जिनके पास इतने काबिल गेंदबाज हैं जो कि व्यस्त शेड्यूल की चुनौती से निपटने के बाद भी प्रतिद्वंद्वी खेल दिखा सकते हैं।” Also Read - भारत में Omicron के सब वेरिएंट BA.5 के एक और मरीज की पुष्टि, दक्षिण अफ्रीका से वडोदरा आया था शख्स

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट पर कोविड और बायो सिक्योर बबल से प्रभाव के बारे में चैपल ने कहा, “कोविड प्रभावित विश्व का मतलब है कि क्रिकेटरों को लंबे समय तक बबल में रहना होगा जो कि उनकी काबिलियत और मानसिक स्वास्थ्य को चुनौती देता है। इसकी वजह से शेड्यूल भी इस तरह से बन रहा है जिसमें टेस्ट मैचों के बीच गैप नहीं है, जो कि गेंदबाजों के लिए मानसिक और शारीरिक तौर पर थका देने वाला है।”

उन्होंने आगे लिखा, “मौजूदा गेंदबाज आजकल के मुश्किल क्रिकेट के लिए खुद को तैयार करने के लिए कई तरह की ट्रेनिंग करते हैं लेकिन इसके बावजूद इंजरी हो जाती हैं। पहले के समय में तेज गेंदबाज फिटनेस बनाए रखने के लिए दौड़ने और नेट में गेंदबाजी करने पर ध्यान देते थे।”